J&K Vs Bengal Ranji Trophy Semi-Final: जम्मू-कश्मीर ने बुधवार (18 फरवरी) को कल्याणी में सेमीफाइनल के चौथे दिन दो बार के पूर्व चैंपियन पश्चिम बंगाल को छह विकेट से हरा दिया। इसी के साथ जम्मू-कश्मीर अपने 67 साल के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया। बंगाल ने जम्मू कश्मीर के सामने 126 रन का लक्ष्य रखा था। जम्मू कश्मीर में 34.4 ओवर में चार विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर दिया। उसकी तरफ से वंशज शर्मा ने नाबाद 43 और अब्दुल समद ने नाबाद 30 रन बनाए।
इससे पहले तेज गेंदबाज आकिब नबी ने मैच में 9 विकेट लेकर बंगाल की जीत की संभावनाओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। जम्मू-कश्मीर ने पहली बार 1959-60 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था। तब से लेकर अब तक उसे मजबूत दावेदार नहीं माना जाता था। जम्मू कश्मीर ने 2013-14 के सत्र में एक दशक से अधिक समय में पहली बार नॉकआउट राउंड के लिए क्वालीफाई किया था।
जम्मू कश्मीर में मंगलवार को तीसरे के दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट पर 43 रन बनाए थे। उसने चौथे दिन की शुरुआत में ही कल के अविजित बल्लेबाज शुभम पुंडीर (27) और कप्तान पारस डोगरा (09) के विकेट गंवा दिए। लेकिन वंशज और समद ने बंगाल के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया। 55 रन की अटूट साझेदारी करके अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई।
पश्चिम बंगाल ने अपनी पहली पारी में 328 रन बनाए थे जिसके जवाब में जम्मू कश्मीर ने 302 रन बनाए। बंगाल हालांकि पहली पारी की मामूली बढ़त का फायदा नहीं उठा पाया। उसकी टीम दूसरी पारी में केवल 99 रन पर आउट हो गई।
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस केंद्र शासित प्रदेश की क्रिकेट टीम के पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचने को उल्लेखनीय उपलब्धि करार देते हुए बुधवार (18 फरवरी) को खिलाड़ियों को बधाई दी। उमर ने जम्मू कश्मीर की जनता की तरफ से भी टीम को बधाई दी। साथ ही विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र के क्रिकेटर जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं अपनी तरफ से और जम्मू कश्मीर के लोगों की तरफ से हमारी क्रिकेट टीम को हार्दिक बधाई देता हूं। मुझे उम्मीद है कि वह दिन दूर नहीं जब हम जम्मू कश्मीर के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देखेंगे।" उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में टीम की प्रगति निरंतर कड़ी मेहनत, अनुशासन, कोचिंग और सहायक स्टाफ के मार्गदर्शन को दर्शाती है।
उमर ने आगे कहा, "हमारी टीम ने उल्लेखनीय प्रगति की है। यह उपलब्धि खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत, कोच के मार्गदर्शन और सहायक स्टाफ के समर्पण का परिणाम है। रणजी ट्रॉफी में एक व्यक्ति के सहारे जीत हासिल नहीं की जा सकती है। यह हमारी पूरी टीम और सहयोगी स्टाफ के सदस्यों की जीत है।"