पीसीबी और बीसीसीआई के बीच सामने आया नया विवाद, मोहसिन नकवी कर सकते है 525 करोड़ रुपये के पुराने हर्जाने की डिमांड!

Pakistan Cricket Board: इस खींचतान ने टी20 विश्व कप के भविष्य और क्रिकेट प्रशंसकों के उत्साह पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। भारत-पाकिस्तान मैच न केवल खेल के लिहाज से बल्कि आईसीसी के राजस्व के लिए भी सबसे बड़ा मुकाबला होता है

अपडेटेड Feb 03, 2026 पर 1:45 PM
Story continues below Advertisement
पीसीबी अब ICC की संभावित कार्रवाई से निपटने के लिए अपनी कानूनी रणनीति तैयार कर रहा है

PCB-BCCI Dispute: बीते दिनों पाकिस्तान ने टी20 वर्ल्ड कप में भारत के साथ होने वाले मैच का बहिष्कार करने की घोषण की। इसी के मद्देनजर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और बीसीसीआई के बीच तनाव अब चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 15 फरवरी को होने वाले टी20 विश्व कप मैच में भारत के खिलाफ न खेलने पर पाकिस्तान पर कोई जुर्माना या प्रतिबंध लगाया, तो पीसीबी प्रमुख मोहसिन नकवी भारत के खिलाफ पुराना कानूनी विवाद फिर से खोल सकते हैं। दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने पहले ही घोषणा कर दी है कि उनकी टीम श्रीलंका तो जाएगी, लेकिन भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करेगी। पीसीबी अब ICC की संभावित कार्रवाई से निपटने के लिए अपनी कानूनी रणनीति तैयार कर रहा है।

$6.3 करोड़ के पुराने हर्जाने का मुद्दा फिर गरमाया

पीसीबी साल 2018 के उस विवाद को फिर से जिंदा करने की योजना बना रहा है, जिसमें उसने बीसीसीआई पर सात द्विपक्षीय सीरीज न खेलने का आरोप लगाते हुए $6.3 करोड़ (लगभग 525 करोड़ रुपये) के मुआवजे की मांग की थी। उस समय आईसीसी की विवाद निवारण समिति ने पाकिस्तान के दावे को खारिज कर दिया था। बीसीसीआई का तर्क था कि भारत सरकार ने उन्हें पाकिस्तान का दौरा करने की अनुमति नहीं दी थी और दोनों बोर्डों के बीच हुआ समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं था। अब पीसीबी इसी मामले को हथियार बनाकर आईसीसी के सामने अपनी दलील पेश करने की तैयारी में है।


'जैसे को तैसा': बीसीसीआई के पुराने तर्क को ही बनाएगा आधार

डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पीसीबी इस बार आईसीसी को भारत के खिलाफ मैच न खेलने का कोई विशेष कारण बताने से मना कर सकता है। वे 2018 की कार्यवाही का हवाला देंगे, जहां बीसीसीआई ने शुरू में पाकिस्तान न जाने का कारण बताने से इनकार कर दिया था और बाद में सरकार की अनुमति न होने की बात कही थी। पीसीबी का मानना है कि यदि भारत सरकार की मनाही एक वैध कारण हो सकता है, तो पाकिस्तान की ओर से भी समान रुख अपनाया जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत तक जा सकता है मामला

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की रणनीति बहुत स्पष्ट है; यदि आईसीसी उनके तर्कों को स्वीकार नहीं करती और उन पर कोई भी वित्तीय या खेल संबंधी जुर्माना लगाती है, तो वे मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में ले जाने पर विचार कर रहे हैं। मोहसिन नकवी के नेतृत्व में बोर्ड का मानना है कि उन्हें भी वही अधिकार और छूट मिलनी चाहिए जो बीसीसीआई को मिलती रही है।

इस खींचतान ने टी20 विश्व कप के भविष्य और क्रिकेट प्रशंसकों के उत्साह पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। भारत-पाकिस्तान मैच न केवल खेल के लिहाज से बल्कि आईसीसी के राजस्व के लिए भी सबसे बड़ा मुकाबला होता है। अगर पाकिस्तान अपने फैसले पर अडिग रहता है, तो आईसीसी को न केवल भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है, बल्कि क्रिकेट की वैश्विक साख पर भी असर पड़ सकता है। अब पूरी नजरें आईसीसी के अगले कदम और इस कानूनी रस्साकशी पर टिकी हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।