Sanjay Manjrekar: 'वर्ल्ड कप मायने रखता है, चैंपियंस ट्रॉफी भी नहीं...' न्यूजीलैंड से सीरीज हारने पर संजय मांजरेकर ने कही ये बात

IND vs NZ: भारत और न्यूजीलैंड के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज न्यूजीलैंड ने 2-1 से जीती, जो भारत में उसकी पहली वनडे सीरीज जीत है। इस हार के बाद कोच गौतम गंभीर और शुभमन गिल की आलोचना हुई, लेकिन पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने गंभीर का खुलकर समर्थन किया

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 4:06 PM
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आज के क्रिकेट में बड़े ग्लोबल टूर्नामेंट्स की अहमियत बाइलेटरल वनडे सीरीज से कहीं ज्यादा होती है

IND vs NZ: भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए 3 मैचों की वनडे सीरीज में को न्यूजीलैंड ने 2-1 से अपने नाम किया है। ये पहली बार है जब न्यूजीलैंड की टीम ने भारत में कोई वनडे सीरीज जीती है। वहीं वनडे सीरीज में हार के बाद से ही कोच गौतम गंभीर और शुभमन गिल की काफी आलोचना हो रही थी। भारत के सीरीज हारने के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने हेड कोच गौतम गंभीर का खुलकर समर्थन किया है। संजय मांजरेकर ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट कर कहा कि, इस हार को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है

पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में कहा कि, आज के क्रिकेट में बड़े ग्लोबल टूर्नामेंट्स की अहमियत बाइलेटरल वनडे सीरीज से कहीं ज्यादा होती है, इसलिए ऐसे नतीजों को जरूरत से ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए।

वर्ल्ड कप लोगों को याद रहता हैं


पूर्व क्रिकेटर मांजरेकर ने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो आज 50 ओवर के क्रिकेट में असल मायने सिर्फ वर्ल्ड कप के ही हैं, चैंपियंस ट्रॉफी भी नहीं।” उन्होंने आगे समझाया कि जहां दूसरे टूर्नामेंट जल्दी भुला दिए जाते हैं, वहीं वर्ल्ड कप का असर लंबे समय तक बना रहता है। उन्होंने आगे कहा, “अगर आप पिछले तीन चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीमों को याद करने की कोशिश करेंगे, तो शायद मुश्किल होगी, लेकिन 50 ओवर के वर्ल्ड कप के विजेता आपको वर्ल्ड कप शुरू होने के दौर से ही आसानी से याद रहेंगे।”

वर्ल्ड कप की करें तैयारी

संजय मांजरेकर ने आगे कहा कि, ऐसी नाकामियां कई बार टीम को खुद का आकलन करने और बड़े टूर्नामेंट से पहले बेहतर तैयारी करने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा, “अगर नाकामियां और खराब प्रदर्शन झेलने हैं, तो बेहतर है कि उन्हें अभी झेल लिया जाए, ताकि अगले वर्ल्ड कप तक टीम पूरी तरह तैयार हो सके।” साथ ही उन्होंने बाइलेटरल सीरीज की तुलना प्रैक्टिस मैच से करते हुए कहा कि इनकी कुल अहमियत सीमित होती है।

बहुत जल्दी भूल जाते हैं लोग बाइलेटरल सीरीज

मांजरेकर ने कहा, “ये बाइलेटरल सीरीज भले ही तय होती हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ वार्म-अप मैच जैसी होती हैं और इन्हें लेकर ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे नतीजे बहुत जल्दी भुला दिए जाते हैं। “हकीकत ये है कि इन बाइलेटरल वनडे सीरीज की अहमियत कुछ समय के लिए ही होती है और दो हफ्ते बाद किसी क्रिकेट फैन को भी इनका नतीजा याद नहीं रहता।”

मांजरेकर ने इस सोच पर भी सवाल उठाया कि वर्ल्ड कप में जीत मौजूदा फॉर्म पर ही निर्भर करती है। उन्होंने कहा, “आखिरकार सब कुछ वर्ल्ड कप को लेकर होता है और वर्ल्ड कप से पहले का फॉर्म यह तय करने का बड़ा पैमाना नहीं होता कि वर्ल्ड कप कौन जीतेगा।”

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