ईशान किशन का 2026 टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में लौटना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता। सिर्फ एक साल पहले तक यह सोचना भी मुश्किल था कि वह फिर से भारत की जर्सी पहन पाएंगे। एक समय ईशान किशन को भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी का जोशीला चेहरा माना जाता था, लेकिन धीरे-धीरे उनका नाम टीम चयन की चर्चाओं से गायब होने लगा। ऐसा लगने लगा था कि टीम इंडिया अब उनके बिना ही आगे बढ़ चुकी है।
लेकिन 27 साल के ईशान किशन ने हार नहीं मानी। उन्होंने न तो आलोचनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया और न ही खुद को सही साबित करने की कोशिश में उलझे। इसके बजाय उन्होंने अपने खेल में समझदारी और ज़िम्मेदारी लाने पर फोकस किया। जो खिलाड़ी पहले सिर्फ अपने अंदाज और instinct पर खेलता था, उसने अब खुद को ऐसा खिलाड़ी बनाने की दिशा में काम किया, जिस पर दबाव भरे हालात में भी भरोसा किया जा सके। यही बदलाव उनकी वापसी की सबसे बड़ी वजह बना।
कैसे की ईशान किशन ने वापसी
कुछ समय तक ऐसा लगने लगा था कि भारतीय टीम उनसे आगे बढ़ चुकी है, और शायद वह खुद भी टीम इंडिया से दूर होते जा रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी को लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं। लोग सवाल उठाने लगे कि क्या मानसिक थकान सिर्फ एक बहाना थी, क्या उनका स्वभाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए ठीक है, और क्या वे अपनी प्रतिभा को बर्बाद कर रहे हैं। लेकिन इन सभी चर्चाओं से दूर, टीवी डिबेट और सोशल मीडिया की हलचल से अलग, ईशान किशन चुपचाप खुद पर काम कर रहे थे। वे सिर्फ एक खिलाड़ी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी खुद को बेहतर बनाने में लगे थे।
उनकी वापसी को किसी बड़े ड्रामे या चमकदार हाइलाइट्स से नहीं जोड़ा जा सकता। यह वापसी छोटे लेकिन मजबूत फैसलों से बनी है—खुद पर दोबारा सोचने से, अनुशासन अपनाने से और मानसिक तौर पर मज़बूत बनने से। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि हर कमबैक शोर-शराबे वाला नहीं होता। कई बार सबसे सच्ची और टिकाऊ वापसी चुपचाप, धैर्य और समझदारी के साथ होती है।
ईशान किशन 2.0
ईशान किशन ने घरेलू क्रिकेट को सज़ा या पीछे जाने का कदम नहीं माना, बल्कि इसे दोबारा भरोसा जीतने का मौका समझा। उन्होंने फिर से पूरी मेहनत शुरू की। लंबे सीज़न खेले, कम दर्शकों के बीच मैदान पर उतरे और ऐसी परिस्थितियों का सामना किया, जहां नाम से ज्यादा खेल की इज़्ज़त मायने रखती है। उनके करियर का असली मोड़ 2025 की सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में आया। इस टूर्नामेंट में किशन ने 10 मैचों में 517 रन बनाए और सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। उनका औसत 57.44 रहा और स्ट्राइक रेट शानदार 197.32 का था। इस दौरान उन्होंने दो अर्धशतक और दो शतक भी लगाए।
लेकिन सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने अपनी टीम झारखंड को खिताब जिताने में बड़ी भूमिका निभाई। ये आंकड़े सिर्फ अच्छी फॉर्म नहीं दिखाते थे, बल्कि उनकी ज़िम्मेदारी और समझदारी को भी दिखाते थे। अब ईशान किशन सिर्फ लोगों को प्रभावित करने के लिए बल्लेबाज़ी नहीं कर रहे थे, बल्कि टीम को आगे ले जाने और लीड करने के लिए खेल रहे थे। यही बदलाव उनके “ईशान किशन 2.0” बनने की सबसे बड़ी पहचान है।
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