Yuvraj Singh: ‘तीन से छह महीने बचे हैं’, जब युवराज सिंह को लेना पड़ा था मुश्किल फैसला

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन के साथ खुलकर हुई बातचीत में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज युवराज सिंह ने कैंसर से अपनी जंग के बारे में बात की। युवराज ने यह भी बताया कि जब डॉक्टरों ने कहा था कि उनके पास सिर्फ तीन से छह महीने का समय बचा है

अपडेटेड Jan 06, 2026 पर 7:12 PM
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युवराज सिंह ने बताया कि डॉक्टर की कुछ बातों ने उन्हें नई उम्मीद और भरोसा दिया

टी20 2007 और वनडे वर्ल्ड कप 2011 में भारत को विजेता बनाने वाले युवराज सिंह की कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है। बहुत कम क्रिकेटर ऐसे रहे हैं जिन्होंने मैदान पर भी और मैदान के बाहर भी इतनी बड़ी लड़ाइयां लड़ी हों। युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में से एक है। 2011 वर्ल्ड कप के बाद वह कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही में युवराज ने एक इटरव्यू में बताया कि कैंसर से अपनी जंग के बारे में खुलकर बात की है। क्रिकेटर ने बताया की उनको कहां गया था कि उनके पास बस तीन से छह महीने ही बचे हैं। लेकिन उन्होंने अपनी हिम्मत से कैंसर को मात दी और दुबारा से भारतीय टीम में वापसी की।

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन के साथ खुलकर हुई बातचीत में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज युवराज सिंह ने कैंसर से अपनी जंग के बारे में बात की। युवराज ने यह भी बताया कि जब डॉक्टरों ने कहा था कि उनके पास सिर्फ तीन से छह महीने का समय बचा है, तब उन्हें जिंदगी से जुड़े कई बेहद कठिन फैसले लेने पड़े थे।

'तीन से छह महीने बचे हैं'


इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन के यूट्यूब चैनल 'द स्विच हिट' पर बात करते हुए युवराज ने कहा, "मेरा मतलब है, जब ऐसा कुछ होता है, तो (मरने के बारे में) आपके दिमाग में सबसे पहला ख्याल यही आता है। मैं ऑस्ट्रेलिया टूर पर जाना चाहता था क्योंकि मैंने अभी-अभी टेस्ट क्रिकेट में अपनी जगह बनानी शुरू की थी और रिटायर होने का कोई इरादा नहीं था। आप जानते हैं, मैं 40 टेस्ट मैचों के लिए 12वां खिलाड़ी था। मैं ऑस्ट्रेलिया टूर पर जा रहा था और फिजियो ने उन्हें बताया कि वह दौरे पर नहीं जा पाएंगे। एक डॉक्टर से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि तुम्हारे पास जीने के लिए तीन से छह महीने बचे हैं। अब तुम तय करो कि तुम क्रिकेट खेलना चाहते हो या इलाज के लिए जाना चाहते हो"

'कीमो नहीं करवाया तो हार्ट अटैक का खतरा'

अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए युवराज सिंह ने बताया कि उस समय उनका करियर और जीवन दोनों ही खतरे में थे। उन्होंने आगे कहा, "उस समय मैंने सोचा मैं क्रिकेट खेलना ज्यादा पसंद करूंगा क्योंकि मुझे नहीं पता कि टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए मेरे पास कितना समय बचा है। क्योंकि ट्यूमर मेरे फेफड़े और दिल के बीच था, जो दिल की नसों पर दबाव बना रहा था। डॉक्टरों ने साफ बताया था कि अगर उन्होंने कीमोथेरेपी नहीं करवाई, तो हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। इसके बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।

डॉक्टर की बातों ने किया मोटिवेट

युवराज सिंह ने बताया कि डॉक्टर की कुछ बातों ने उन्हें नई उम्मीद और भरोसा दिया। उन्होंने कहा, "मुझे डॉक्टर की बातें याद हैं जब मैं हॉस्पिटल गया और सभी टेस्ट हो चुके थे, तब डॉक्टर ने मुझसे कहा था, “तुम यहां से ऐसे इंसान की तरह बाहर निकलोगे, जिसे कभी कैंसर हुआ ही नहीं।” युवराज के मुताबिक, "डॉक्टर की यही पहली बात उनके लिए सबसे बड़ी हिम्मत बनी और उसी भरोसे ने उन्हें इलाज के लिए आगे बढ़ने की ताकत दी।" उन्होंने बताया कि "मुझे याद है जब मेरा ट्रीटमेंट खत्म हुआ और उन्होंने कहा, 'हम बस 15 दिनों तक तुम्हें मॉनिटर करेंगे।' डॉक्टर ने कहा, 'तुम ठीक हो। और तुम वापस जाकर फिर से क्रिकेट खेल सकते हो।' ये पल मेरे लिए सबसे खुशी वाला था

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