Direct-to-Cell Satellite Service : एलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने अपनी डायरेक्ट टू सेल टेक्नोलॉजी की सफल टेस्टिंग की है। दावा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से फोन में सिग्नल सीधे सैटेलाइट से आएंगे। यानी अब मोबाइल टावर की कोई जरूरत ही नहीं होगी। बता दें कि इस टेक्नोलॉजी पर स्टारलिंक लंबे समय से काम कर रही है। अब जाकर इसकी टेस्टिंग सफल हो पाई है। चलिए डिटेल में जानते हैं कि इस टेक्नोलॉजी से क्या-क्या फायदे होंगे।
यूक्रेन की सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी Kyivstar ने मंगलवार को कहा कि उसने पूर्वी यूरोप में मस्क की स्टारलिंक डायरेक्ट-टू-सेल सैटेलाइट तकनीक का पहला फील्ड परीक्षण सफलतापूर्वक किया है। Kyivstar ने बताया कि यह पायलट परीक्षण जाइटॉमिर (Zhytomyr) क्षेत्र में स्टारलिंक की डायरेक्ट-टू-सेल तकनीक का उपयोग करके किया गया, जहां इसके CEO ओलेक्सांद्र कोमारोव और यूक्रेन के डिजिटल परिवर्तन मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने स्मार्टफोन के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान किया।
क्या है डायरेक्ट टू सेल टेक्नोलॉजी?
डायरेक्ट टू सेल टेक्नोलॉजी का मकसद उन इलाकों में भरोसेमंद कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है जहां मोबाइल नेटवर्क मौजूद नहीं है। यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त देश में यह तकनीक काफी कारगर साबित हुई है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से मोबाइल में सीधे नेटवर्क भेजे जाते हैं। इस सेवा के लिए उपयोग किए जाने वाले सैटेलाइट हाई टेक्नोलॉजी सेलुलर मॉडेम से लैस हैं, जो अंतरिक्ष में सेल टावरों की तरह काम करते हैं और जमीन पर मौजूद स्मार्टफोन पर सीधे सिग्नल भेजते हैं। इस टेक्नोलॉजी के आते ही जमीन से मोबाइल टावर का काम खत्म हो जाएगा।
क्या मिट जाएंगे नेटवर्क डेड जोन?
दुनिया भर की दूरसंचार कंपनियां डेड जोन को मिटाने का प्रयास कर रही है, और इसके साथ ही सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की ओर रुख कर रही हैं, खासकर उन दूरदराज के इलाकों में जहां स्थलीय नेटवर्क या तो बहुत महंगे हैं या गंभीर भौगोलिक चुनौतियों का सामना करते हैं।
स्पेस एक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक ने डायरेक्ट-टू-सेल सेवा के लिए 10 देशों की दूरसंचार कंपनियों के साथ समझौते किए हैं, और Kyivstar यूरोप की पहली कंपनी होगी जो इसे लॉन्च करेगी।
Kyivstar और स्टारलिंक 2025 की चौथी तिमाही में अपनी नई सेवा की शुरुआत कर सकते हैं। पहले चरण में यूजर्स को सिर्फ मैसेज भेजने और पाने की सुविधा मिलेगी। जबकि 2026 की शुरुआत में मोबाइल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इंटरनेट भी आम लोगों के लिए शुरू करने का प्लान है।
वहीं, जुलाई में रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कोमारोव ने कहा था कि VEON (Kyivstar की पैरेंट कंपनी) अन्य कंपनियों जैसे Amazon के Project Kuiper से भी बातचीत कर रही है ताकि यूक्रेन से बाहर के देशों में भी मोबाइल के लिए सैटेलाइट नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
डायेरक्ट टू सेल टेक्नोलॉजी से क्या होगा फायदा?
डायेरक्ट टू सेल सैटेलाइट सर्विस इमरजेंसी में काफी मददगार होगी। आमतौर पर साइक्लोन, भूकंप जैसी आपदा पर मोबाइल टावर गिरने, वायरिंग की समस्या आने या खराब होने जैसी समस्या होती है। जब फोन सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट होंगे तो आपदा वाली जगह पर भी कनेक्टिविटी चालू रहेगी और बिना देरी इमरजेंसी सर्विसेज सपोर्ट मिलेगा।