भीषण गर्मी के मौसम में जब तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो अधिकांश लोग राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर, कूलर या पंखों पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों पहले, जब बिजली जैसी कोई सुविधा मौजूद नहीं थी, तब भारत के राजमहलों, किलों और हवेलियों में रहने वाले लोग इतनी भीषण गर्मी से कैसे बचते थे? हैरानी की बात यह है कि उस दौर के भारतीय वास्तुकारों ने प्रकृति के नियमों को समझकर ऐसी अनोखी तकनीक विकसित की थी, जो बिना किसी मशीन या बिजली के इमारतों को ठंडा रखने में मदद करती थी। इस पारंपरिक तकनीक का सबसे अहम हिस्सा थी पत्थर की नक्काशीदार जाली (Jaali Screen)।
