कड़ाके की ठंड में आज हम कंबल, रजाई, ब्लोअर और हीटर के बिना रहना सोच भी नहीं सकते, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब इंसान के पास इन आधुनिक सुविधाओं का नाम-निशान तक नहीं था। न मोटी रजाइयां थीं, न ऊन के स्वेटर, न ही बिजली का हीटर फिर भी लोग बर्फ जैसी ठंडी रातें काट लेते थे। उस समय इंसान का सबसे बड़ा हथियार था उसकी समझदारी और प्रकृति का साथ। जंगल, गुफाएं, मिट्टी की झोपड़ियां, आग की गर्माहट और शरीर को बचाने के देसी तरीक़े इन सबके भरोसे इंसान ने सदियों तक सर्दियों से जंग जीती।
