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'जब कास्ट सिस्टम है ही नहीं...' 'Phule' फिल्म पर CBFC की सिफारिशों पर भड़के अनुराग कश्यप, ब्राह्मणों को सुनाई खरी खोटी

CBFC ने 7 अप्रैल को फिल्म को ‘यू’ सर्टिफिकेट दिया, लेकिन कई काट छांट की मांग की गई, जिसमें ‘महार’, ‘मांग’, ‘पेशवाई’ जैसे जातिगत संदर्भों को हटाना और “3,000 साल पुरानी गुलामी” वाले वाक्यांश को बदलकर “काई साल पुरानी गुलामी” करने को कहा गया। महादेवन ने पुष्टि की कि ये बदलाव कर दिए गए थे

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 18, 2025 पर 8:34 PM
'जब कास्ट सिस्टम है ही नहीं...' 'Phule' फिल्म पर CBFC की सिफारिशों पर भड़के अनुराग कश्यप, ब्राह्मणों को सुनाई खरी खोटी
'Phule' फिल्म पर CBFC की सिफारिशों पर भड़के अनुराग कश्यप, ब्राह्मणों को सुनाई खरी खोटी

फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप ने समाज सुधारक ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की बायोपिक को लेकर उठे विवाद को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और ब्राह्मण समुदाय के एक वर्ग पर निशाना साधा है। अनंत महादेवन के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म 11 अप्रैल को रिलीज होने वाली थी, लेकिन भारी विरोध के चलते इसे 25 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया। इस फिल्म में मुख्य किरदार प्रतीक गांधी और पत्रलेखा ने निभाया है।

CBFC ने 7 अप्रैल को फिल्म को ‘यू’ सर्टिफिकेट दिया, लेकिन कई काट छांट की मांग की गई, जिसमें ‘महार’, ‘मांग’, ‘पेशवाई’ जैसे जातिगत संदर्भों को हटाना और “3,000 साल पुरानी गुलामी” वाले वाक्यांश को बदलकर “काई साल पुरानी गुलामी” करने को कहा गया। महादेवन ने पुष्टि की कि ये बदलाव कर दिए गए थे।

अनुराग कश्यप ने Instagram पर CBFC के फैसले लेने पर सवाल उठाए और 'धांधली वाली व्यवस्था' की आलोचना की। उन्होंने लिखा, "पंजाब 95, टीस, धड़क 2, फुले - मुझे नहीं पता कि कितनी दूसरी फिल्में ब्लॉक हैं... यह जातिवादी, क्षेत्रवादी, नस्लवादी सरकार शर्म के मारे आईने में अपना चेहरा भी नहीं देख सकती है। वे खुलकर यह भी नहीं कह सकते कि उन्हें क्या परेशान। वे कायर हैं।"

उन्होंने एक दूसरी पोस्ट में लिखा, " “मेरी जिंदगी का पहला नाटक ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले पर था। भाई अगर जातिवाद नहीं होता इस देश में तो उनको क्या जरूरत थी लड़ने की। अब ये ब्राह्मण लोगों को शर्म आ रही है या वो शर्म में मरे जा रहे हैं या फिर एक अलग (वैकल्पिक) ब्राह्मण भारत में जी रहे हैं, जो हम देख रहे हैं, जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं। कृपया कोई समझाए- यहां असली मूर्ख कौन है? मेरा सवाल ये है कि जब फिल्म सेंसरशिप के लिए जाती है, तो बोर्ड में चार सदस्य होते हैं। आखिर समूहों और विंग्स को फिल्मों तक पहुंच कैसे मिलती है, जब तक कि उन्हें इसकी अनुमति न दी जाए? पूरी बकवास प्रणाली ही धांधली वाली है।”

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