जमीन के नीचे 381 फीट गहराई में रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में लगते हैं 38 मिनट

Deepest Undergroud Railway Station: भारत में हजारों रेलवे स्टेशन हैं, जिनमें कुछ सामान्य तो कुछ अपनी खास बनावट और लोकेशन के कारण अलग पहचान रखते हैं। कहीं स्टेशन पहाड़ों के बीच बने हैं, तो कहीं समुद्र के किनारे। वहीं कुछ स्टेशन ऐसे भी हैं, जो जमीन की सतह से काफी नीचे बनाए गए हैं, जहां ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को नीचे जाना पड़ता है

अपडेटेड Dec 18, 2025 पर 1:44 PM
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Deepest Undergroud Railway Station: भारत में सबसे गहरा अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन कोलकाता का हावड़ा मेट्रो स्टेशन है।

भारत में रेलवे स्टेशनों का नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में गिना जाता है। देश के कोने-कोने में फैले हजारों स्टेशन न सिर्फ यात्रियों की आवाजाही का जरिया हैं, बल्कि कई जगहों पर अपनी अनोखी बनावट और लोकेशन की वजह से पहचान भी बनाते हैं। अधिकतर स्टेशन सामान्य होते हैं, लेकिन कुछ स्टेशन ऐसे हैं जो पहाड़ों के बीच बसे होने या समुद्र के पास स्थित होने के कारण खास माने जाते हैं। वहीं कुछ रेलवे स्टेशन ऐसे भी हैं, जो जमीन की सतह से काफी नीचे बनाए गए हैं। इन स्टेशनों पर ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को ऊपर से नीचे उतरना पड़ता है, जो अपने आप में एक अलग अनुभव होता है।

ऐसे अंडरग्राउंड स्टेशन न केवल इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण हैं, बल्कि शहरों की भीड़, जगह की कमी और भौगोलिक चुनौतियों का समाधान भी पेश करते हैं। यही वजह है कि ऐसे स्टेशन लोगों के बीच हमेशा चर्चा का विषय बने रहते हैं।

भारत का सबसे गहरा अंडरग्राउंड स्टेशन


भारत में सबसे गहरा अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन कोलकाता का हावड़ा मेट्रो स्टेशन है। ये कोलकाता मेट्रो की ग्रीन लाइन पर स्थित है और जमीन से करीब 112 फीट नीचे बना हुआ है। ये स्टेशन अपनी गहराई के कारण काफी चर्चित है, हालांकि दुनिया के सबसे गहरे स्टेशन का रिकॉर्ड इसके नाम नहीं है।

दुनिया का सबसे गहरा रेलवे स्टेशन कहां है

दुनिया का सबसे गहरा रेलवे स्टेशन चीन में स्थित है। ये मेट्रो स्टेशन चीन के चोंगकिंग शहर के हॉन्ग्यानकुन इलाके में बनाया गया है। ये स्टेशन जमीन से करीब 116 मीटर यानी लगभग 381 फीट नीचे स्थित है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इतनी गहराई में करीब 40 मंजिला इमारत आसानी से समा सकती है।

प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में लगता था ज्यादा समय

इस स्टेशन के मुख्य गेट से प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में पहले सीढ़ियों से करीब 38 मिनट लग जाते थे। बाद में एस्केलेटर बनने के बाद यह समय घटकर लगभग 10 मिनट रह गया। इस अंडरग्राउंड स्टेशन के निर्माण में करीब 6 साल का समय लगा। इसका निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ था और 2022 में पूरा हुआ।

यूक्रेन का रिकॉर्ड टूटा

हॉन्ग्यानकुन स्टेशन बनने से पहले दुनिया का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन यूक्रेन की राजधानी कीव में स्थित आर्सेनलना स्टेशन था, जिसकी गहराई 105.5 मीटर है। अब ये रिकॉर्ड चीन के हॉन्ग्यानकुन स्टेशन ने तोड़ दिया है। वहीं भारत में सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन होने का खिताब कोलकाता मेट्रो के पास है।

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