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'कार बेचकर जुटाए पैसे...' HCL के फाउंडर ने बताया कैसे 6 लोगों ने खड़ी की बड़ी टेक कंपनी

1976 में, जब ज्यादातर भारतीयों के लिए कंप्यूटर नई चीज थी और स्टार्टअप के बारे में शायद ही कोई जानता था, तब छह युवा पेशेवरों ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक जोखिम भरा कदम उठाने का फैसला किया। सिर्फ 1.87 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ उन्होंने एक ऐसी कंपनी शुरू की, जो मशहूर टेक कंपनी बन गई।

Edited By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Aug 12, 2026 पर 12:00 PM
'कार बेचकर जुटाए पैसे...' HCL के फाउंडर ने बताया कैसे 6 लोगों ने खड़ी की बड़ी टेक कंपनी
HCL के फाउंडर ने सुनाई कहानी, बताया कैसे 6 लोगों ने खड़ी की बड़ी टेक कंपनी

1976 में, जब ज्यादातर भारतीयों के लिए कंप्यूटर नई चीज थी और स्टार्टअप के बारे में शायद ही कोई जानता था, तब छह युवा पेशेवरों ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक जोखिम भरा कदम उठाने का फैसला किया। सिर्फ 1.87 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ उन्होंने एक ऐसी कंपनी शुरू की, जो आगे चलकर HCL के नाम से जानी गई।

इन छह संस्थापकों में शिव नाडर, अजय चौधरी, अर्जुन मल्होत्रा, योगेश वैद्य, सुभाष अरोड़ा और डी.एस. पुरी शामिल थे। चौधरी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी के शुरुआती दिनों की कहानी साझा की।

इन सभी संस्थापकों ने अपनी नौकरियां छोड़ दी थीं। कंपनी शुरू करने के लिए उन्होंने अपनी बचत लगाई, कुछ पैसे उधार लिए और यहां तक कि अपनी एक कार भी बेच दी। शुरुआत में उनका ऑफिस दिल्ली के गोल्फ लिंक्स इलाके में एक छोटे से बरसाती कमरे में था। उन्होंने अपनी इस नई कंपनी का नाम पहले Microcomp रखा था।

उस समय, उन छह लोगों का मानना ​​था कि माइक्रोप्रोसेसर दुनिया को बदल देंगे। उनका मकसद एक भारतीय कंप्यूटर बनाना था, लेकिन एक बड़ी रुकावट थी: उनके पास मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नहीं था।

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