ई-सिगरेट की लत ने लड़की को पहुंचाया अस्पताल, X-Ray देख हर कोई रह गया दंग!

आजकल युवा तेजी से बदलते ट्रेंड्स के प्रभाव में आकर वेपिंग जैसी आदतें अपना रहे हैं। ई-सिगरेट को सुरक्षित समझना एक बड़ी भूल है, क्योंकि इसमें मौजूद निकोटीन और जहरीले केमिकल फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। ये आदत दिखने में फैशनेबल लगती है, लेकिन इसके नतीजे बेहद खतरनाक हो सकते हैं

अपडेटेड Dec 27, 2025 पर 2:19 PM
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2025 में सच्चाई सामने आई—केली को फेफड़ों का कैंसर था।

आज के समय में युवा वर्ग तेजी से बदलते लाइफस्टाइल और सोशल ट्रेंड्स से आसानी से प्रभावित हो रहा है। अच्छी आदतों के साथ-साथ कई बार गलत चीजें भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती हैं। सिगरेट के बाद अब ई-सिगरेट यानी वेपिंग युवाओं के बीच एक नए फैशन के तौर पर उभरी है, जिसे कई लोग सुरक्षित विकल्प मान लेते हैं। छोटी-सी डिवाइस से निकलने वाला धुआं भले ही सामान्य लगे, लेकिन इसके पीछे छिपे खतरे बेहद गंभीर हैं। वेपिंग में इस्तेमाल होने वाले लिक्विड को गर्म करने पर निकोटीन और कई हानिकारक केमिकल शरीर में प्रवेश करते हैं, जो धीरे-धीरे फेफड़ों और पूरे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं।

शुरुआत में ये आदत मजे या शौक के रूप में लग सकती है, लेकिन समय के साथ ये लत बन जाती है। कई युवा इसके दुष्परिणामों से अनजान रहते हैं और तब तक सच सामने आता है, जब हालात बिगड़ चुके होते हैं। यही वजह है कि वेपिंग को लेकर जागरूकता आज बेहद जरूरी हो गई है।

15 साल में लगी वेपिंग की लत


इंग्लैंड के मैनचेस्टर की रहने वाली केली बोडा की कहानी आज दुनियाभर के युवाओं के लिए चेतावनी है। केली ने सिर्फ 15 साल की उम्र में वेपिंग शुरू की थी। धीरे-धीरे ये आदत इतनी बढ़ गई कि वो हफ्ते में करीब 600 बार ई-सिगरेट का पफ लेने लगीं। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यही आदत उनकी जिंदगी को किस मोड़ पर ले जाएगी।

अजीब खांसी ने दी पहली चेतावनी

जनवरी 2025 में केली को अजीब तरह की खांसी शुरू हुई। खांसते वक्त भूरे रंग का बलगम निकलता था, जिसमें दानेदार कण नजर आते थे। जब उन्होंने डॉक्टरों को दिखाया, तो इसे मामूली छाती का इंफेक्शन बताकर नजरअंदाज कर दिया गया। कई बार डॉक्टरों के पास जाने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली।

खांसी में खून, एक्स-रे में दिखी सच्चाई

हालात तब गंभीर हो गए जब खांसी के साथ खून आने लगा। एक्स-रे में फेफड़े में एक “शैडो” दिखाई दिया। उम्र कम होने के कारण डॉक्टरों ने पहले कैंसर की संभावना से इनकार किया, लेकिन आगे की जांच के लिए कई बायोप्सी की गईं। सात बायोप्सी के बाद अगस्त 2025 में सच्चाई सामने आई—केली को फेफड़ों का कैंसर था।

सर्जरी और कीमो ने तोड़ दिया शरीर

कैंसर की खबर से केली और उनका परिवार सदमे में आ गया। सितंबर में उनकी सर्जरी हुई, जिसमें दाहिने फेफड़े का निचला हिस्सा और कुछ लिम्फ नोड्स निकाल दिए गए। जांच में पता चला कि कैंसर फैल चुका है, जिससे स्टेज-1 से बढ़ाकर स्टेज-3 कर दिया गया। इसके बाद कीमोथेरेपी शुरू हुई, जिसने केली को अंदर तक झकझोर दिया—तेज कमजोरी, खून की उल्टियां, पेशाब में खून और कुछ ही दिनों में वजन तेजी से गिर गया।

मानसिक दर्द भी कम नहीं

शारीरिक दर्द के साथ-साथ मानसिक असर भी गहरा रहा। केली ने बताया कि सर्जरी के बाद उन्हें PTSD हो गया। आज भी उन्हें डरावने सपने आते हैं, जिनमें वो अस्पताल के बिस्तर पर सांस के लिए जूझती नजर आती हैं।

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