ऑनलाइन पार्सल खोलते समय हम सभी को वह बबल रैप बेहद मजेदार लगता है, जिसे फोड़ना लगभग आदत बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मजेदार और उपयोगी चीज वैज्ञानिक असफलता का नतीजा थी? हाँ, जिस बबल रैप को आज हम पैकेजिंग का सबसे भरोसेमंद साधन मानते हैं, उसे कभी दीवारों की शोभा बढ़ाने के लिए बनाया गया था। साल 1957 में अमेरिकी इंजीनियर अल्फ्रेड फील्डिंग और मार्क चवनेस ने प्लास्टिक वॉलपेपर बनाने का प्रयोग किया। उनका इरादा था कि दीवारों पर आधुनिक और टेक्सचर्ड डिज़ाइन लगे। लेकिन प्रयोग के दौरान दो प्लास्टिक शीट्स के बीच हवा फंस गई, और शीट बुलबुले वाली निकल आई। वॉलपेपर के तौर पर यह पूरी तरह फेल साबित हुआ।
हालांकि, यही असफलता आगे चलकर बुलबुले वाला प्लास्टिक ऑनलाइन पार्सल और नाजुक सामान की दुनिया में क्रांति लेकर आया। इसे देखकर आईबीएम जैसे बड़े ब्रांडों ने इसे कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए आदर्श कुशन माना, और यहीं से बबल रैप की कहानी और सफलता की उड़ान शुरू हुई
1957: गलती से हुआ आविष्कार
बबल रैप की कहानी शुरू होती है 1957 में, जब अमेरिकी इंजीनियर अल्फ्रेड फील्डिंग और मार्क चवनेस न्यू जर्सी के एक गैरेज में प्रयोग कर रहे थे। उनका मकसद था ऐसा प्लास्टिक वॉलपेपर बनाना जिसमें उभार या टेक्सचर हो, ताकि दीवारों पर आधुनिक लुक आए।
लेकिन प्रयोग के दौरान मशीन में गड़बड़ी हुई और दो प्लास्टिक शीट्स के बीच हवा फंस गई। परिणामस्वरूप एक शीट के ऊपर छोटे-छोटे बुलबुले बन गए। वॉलपेपर के तौर पर यह पूरी तरह फेल प्रोजेक्ट साबित हुआ।
पहला असफल प्रयास और नया प्रयोग
इंजीनियरों ने इसे बेचने की कोशिश की, लेकिन ग्राहक इसे पसंद नहीं आए। इसके बाद उन्होंने सोचा कि फंसी हवा इंसुलेटर का काम कर सकती है। उन्होंने इसे ग्रीनहाउस की छत और दीवारों पर लगाने की कोशिश की, लेकिन यह आइडिया भी बाजार में असफल रहा।
1960: बबल रैप को मिली नई पहचान
बबल रैप की किस्मत का सितारा चमका जब आईबीएम (IBM) ने 1960 में नया 1401 कंप्यूटर लॉन्च किया। महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान को भेजने में कागज और रुई असफल साबित हो रहे थे।
मार्क चवनेस ने बबल रैप आईबीएम को दिखाया। आईबीएम ने समझा कि हवा भरे बुलबुले कंप्यूटर के लिए आदर्श कुशन हैं। इसी से बबल रैप की सफलता की असली उड़ान शुरू हुई।
बबल रैप की दुनिया में सफलता
कंप्यूटर और नाजुक सामान की सुरक्षित डिलीवरी के बाद, पूरी दुनिया में बबल रैप की मांग बढ़ गई। सील्ड एयर कॉर्पोरेशन ने इसे ट्रेडमार्क कराया। आज बबल रैप न केवल सामान को सुरक्षित रखता है, बल्कि हल्का होने की वजह से शिपिंग लागत भी कम करता है।