ऑनलाइन पार्सल खोलते समय हम सभी को वह बबल रैप बेहद मजेदार लगता है, जिसे फोड़ना लगभग आदत बन गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह मजेदार और उपयोगी चीज वैज्ञानिक असफलता का नतीजा थी? हाँ, जिस बबल रैप को आज हम पैकेजिंग का सबसे भरोसेमंद साधन मानते हैं, उसे कभी दीवारों की शोभा बढ़ाने के लिए बनाया गया था। साल 1957 में अमेरिकी इंजीनियर अल्फ्रेड फील्डिंग और मार्क चवनेस ने प्लास्टिक वॉलपेपर बनाने का प्रयोग किया। उनका इरादा था कि दीवारों पर आधुनिक और टेक्सचर्ड डिज़ाइन लगे। लेकिन प्रयोग के दौरान दो प्लास्टिक शीट्स के बीच हवा फंस गई, और शीट बुलबुले वाली निकल आई। वॉलपेपर के तौर पर यह पूरी तरह फेल साबित हुआ।
