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Unnamed Railway Station: भारत का एकमात्र रेलवे स्टेशन, जिसका नहीं है कोई नाम, वजह जान रह जाएंगे हैरान

क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा भी रेलवे स्टेशन है, जिसका कोई नाम नहीं हैं। लेकिन यहां पर हर दिन कई ट्रेने भी रुकती है और बड़ी संख्या में यात्री सफर के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। आइए जानते हैं इस अनोखे रेलवे स्टेशन के बारे में

Edited By: Ankita Pandeyअपडेटेड Sep 14, 2026 पर 8:20 PM
Unnamed Railway Station: भारत का एकमात्र रेलवे स्टेशन, जिसका नहीं है कोई नाम, वजह जान रह जाएंगे हैरान
स्टेशन का नाम न होने के पीछे रैना और रैनगर गांवों के बीच चल रहा पुराना विवाद बताया जाता है

भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन भी कहा जाता है। हर दिन ट्रेन से हजारों लोग अपने मंजिल पर पहुंचते हैं। वहीं भारत में रेलवे का बहुत बड़ा नेटवर्क है, जहां हजारों से ज्यादा रेलवे स्टेशन हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा भी रेलवे स्टेशन है, जिसका कोई नाम नहीं हैं। लेकिन यहां पर हर दिन कई ट्रेने भी रुकती है और बड़ी संख्या में यात्री सफर के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ये रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित है। यहां लगे साइनबोर्ड पर स्टेशन का नाम ही नहीं है, जिसकी वजह से यात्रियों को स्टेशन की पहचान करने में परेशानी होती है। पहली बार इस स्टेशन पर पहुंचने वाले लोग खाली बोर्ड देखकर हैरान रह जाते हैं। आइए जानते हैं इस अनोखे रेलवे स्टेशन के बारे में

पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में स्थित ये रेलवे स्टेशन बर्धमान से करीब 35 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व रेलवे के बांकुरा-मैसग्राम ब्रॉड गेज रूट पर स्थित है। स्टेशन के बोर्ड पर नाम नहीं लिखा है, लेकिन यहां रोज करीब छह ट्रेनें रुकती हैं। इन ट्रेनों के जरिए आसपास के गांवों में रहने वाले लोग दूसरे शहरों और इलाकों तक आसानी से आ-जा पाते हैं।

जानें क्या है पूरा विवाद

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन का नाम न होने के पीछे रैना और रैनगर गांवों के बीच चल रहा पुराना विवाद बताया जाता है। पहले यहां नैरो-गेज रेलवे लाइन थी और स्टेशन का नाम रैनगर था। साल 2008 में नई ब्रॉड-गेज लाइन बनने के बाद स्टेशन की नई इमारत रैना गांव की जमीन पर बनाई गई। इसके बाद रैना के लोगों ने स्टेशन का नाम अपने गांव के नाम पर रखने की मांग की, जबकि रैनगर के लोगों का कहना था कि, स्टेशन का पुराना नाम ही बरकरार रखा जाए। इसी विवाद के कारण स्टेशन का नाम अब तक तय नहीं हो पाया है।

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