भारत में राजशाही समाप्त हुए कई दशक हो चुके हैं, लेकिन कुछ लोग अब भी अपने शाही वंश से जुड़े होने का दावा करते हैं। ऐसा ही एक नाम प्रिंस याकूब हबीबुद्दीन तुसी का है, जो खुद को आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर का छठी पीढ़ी का वंशज बताते हैं। उनके मुताबिक, उनका ब्लड रिलेशनशीप मुगल सम्राटों औरंगजेब, शाहजहां और अकबर से जुड़ा है। वह कई ऐतिहासिक धरोहरों पर अपने हक का दावा कर चुके हैं, जिससे वह अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं।
ताजमहल पर किया मालिकाना हक का दावा
प्रिंस तुसी सबसे ज्यादा चर्चा में तब आए जब उन्होंने ताजमहल पर अपना अधिकार जताया। ताजमहल, जो शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल के लिए बनवाया था। भारत की सबसे मशहूर इमारतों में से एक है। तुसी ने अदालत में डीएनए टेस्ट भी करवाया, जिसे हैदराबाद कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इस दावे ने काफी मीडिया अटेंशन खींचा, हालांकि सरकार या किसी अन्य संस्था ने इसे मान्यता नहीं दी।
अयोध्या विवाद में आया नाम
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर चले लंबे विवाद में भी प्रिंस तुसी का नाम सामने आया। जब वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद की जमीन पर हक जताया, तो तुसी ने कहा कि अगर यह संपत्ति बाबर की थी, तो उस पर असली हक उनका और उनके परिवार का है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राम मंदिर बनने से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए सोने की ईंट दान करने की भी पेशकश की थी।
औरंगजेब की कब्र के संरक्षक
प्रिंस तुसी खुद को महाराष्ट्र में स्थित मुगल सम्राट औरंगजेब की कब्र का मुतवल्ली (संरक्षक) भी बताते हैं। वह इस ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा को लेकर काफी एक्टिव रहते हैं। कुछ समय पहले कब्र को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के बाद उन्होंने भारत के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।
प्रिंस तुसी अपनी राजसी पहचान को भी बनाए रखते हैं। वह अक्सर लंबे शाही लिबास और मुगलों जैसी टोपी पहने नजर आते हैं। उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल भी उनकी शाही विरासत को दर्शाते हैं, जहां वह मुगल साम्राज्य की भव्यता को दिखाने की कोशिश करते हैं।