International Women's Day 2026: 8 मार्च को मनाया जाएगा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, जानिए इस साल की थीम और 8 मार्च का महत्व

International Women's Day 2026: महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। 20वीं सदी में महिला अधिकार आंदोलन के बाद महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई थी। आइए जानें इस साल की थीम क्या है और 8 मार्च का महत्व

अपडेटेड Mar 05, 2026 पर 6:09 PM
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम हर साल अलग होती है।

International Women's Day 2026: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। दुनिया भर की महिलाओं को समर्पित इस महिला अधिकारों, लैंगिक समानता और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों के बारे में ध्यान दिलाता है। ये दिन न सिर्फ भारत की महिलाओं के लिए खास है, बल्कि पूरी दुनिया की स्त्रियों के लिए भी खास दिन होता है। इस दिन महिलाओं की उपब्धियों के बारे में बात की जाती है और उनके अस्तित्व का जश्न मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम हर साल अलग होती है। महिलाओं के समर्पित ये खास दिन हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है, क्योंकि पहली बार महिलाओं 8 मार्च के दिन ही ‘ब्रेड ऐंड पीस’ के लिए हड़ताल की थी। आइए जानें इसका इतिहास क्या है और इस साल का क्या थीम है?

2026 की थीम क्या है?

संयुक्त राष्ट्र ने 2026 के लिए "Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls" की आधिकारिक थीम घोषित की है। इस थीम के जरिए महिलाओं के प्रति दुनिया भर में अब भी मौजूद कानूनी कमियों पर फोकस किया गया है। आंकड़े दिखाते हैं कि अभी महिलाओं के पास दुनिया भर में पुरुषों के मुकाबले सिर्फ 64% कानूनी अधिकार हैं।

2026 के कैंपेन का मकसद "कागज पर लिखे अधिकारों" से आगे बढ़कर यह सुनिश्चित करना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में कानून असल में लागू हों। भारत में, इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में महिलाओं के लिए सुरक्षा, बराबर सैलरी और न्याय तक बेहतर पहुंच पर चर्चा शामिल है।

8 मार्च तारीख का महत्व

दुनिया में महिला अधिकारों के इतिहास में ये तारीख बदलाव और विरोध का प्रतीक है। इस दिन की शुरुआत भले ही विरोध से हुई थी, लेकिन अब ये पूरी दुनिया में एक जश्न की तरह मनाया जाता है। इसकी जड़ें मजदूर आंदोलनों और राजनीतिक संघर्ष की जमीन में मजबूती से जमी हुई हैं।


1908: 15,000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क शहर में मार्च निकाला और काम के घंटे कम करने, बेहतर सैलरी और वोट देने के अधिकार की मांग की।

1910: क्लारा जेटकिन नाम की एक महिला ने कोपेनहेगन में एक कॉन्फ्रेंस में एक इंटरनेशनल डे का आइडिया दिया। वहां मौजूद 17 देशों की 100 महिलाओं ने एकमत होकर इस पर सहमति जताई।

1917: पहले वर्ल्ड वॉर के दौरान, रूस में महिलाओं ने "ब्रेड एंड पीस" के लिए 8 मार्च को हड़ताल की। इसके बाद आखिरकार जार को गद्दी छोड़नी पड़ी और महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला।

1975: संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने की आधिकारिक मान्यता दी, और तब से यह कई देशों में पब्लिक हॉलिडे बन गया है।

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