भारत सरकार की एडवाइजरी जारी, ईरान में रह रहे नागरिकों से जल्द निकलने की अपील

India Iran advisory: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने सभी भारतीयों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द सुरक्षित और तय मार्गों के जरिए ईरान छोड़ दें, ताकि किसी भी खतरे से बचा जा सके

अपडेटेड Apr 08, 2026 पर 1:37 PM
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India Iran advisory: भारत सरकार ने नागरिकों से खास अपील की है कि वो किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें

पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात ने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है, खासकर ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को लेकर। मौजूदा स्थिति को संवेदनशील मानते हुए भारतीय दूतावास ने सख्त एडवाइजरी जारी की है, जिसमें लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से देश छोड़ने की सलाह दी गई है। सरकार का फोकस साफ है—किसी भी जोखिम से पहले ही नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। इसी वजह से दूतावास लगातार लोगों के संपर्क में बना हुआ है और उन्हें तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जा रहा है।

हालात भले ही पूरी तरह नियंत्रण से बाहर न हों, लेकिन अनिश्चितता को देखते हुए सतर्कता बेहद जरूरी मानी जा रही है। यही कारण है कि इस बार सरकार कोई ढिलाई नहीं बरत रही और समय रहते कदम उठाने पर जोर दे रही है।

दूतावास की सख्त चेतावनी


ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने नागरिकों से अपील की है कि वो जल्द से जल्द बाहर निकलें, लेकिन पूरी सावधानी के साथ। दूतावास ने स्पष्ट किया है कि केवल तय किए गए सुरक्षित रूट्स का ही उपयोग किया जाए। बिना अनुमति किसी भी सीमा की ओर बढ़ना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए हर कदम दूतावास के संपर्क में रहकर उठाने को कहा गया है।

इमरजेंसी हेल्पलाइन जारी

नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दूतावास ने कई हेल्पलाइन नंबर और ईमेल आईडी जारी किए हैं। ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय तुरंत संपर्क कर सकें और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकें।

पहले दी गई थी रुकने की सलाह

दिलचस्प बात ये है कि इससे पहले हालात को देखते हुए नागरिकों को 48 घंटे तक सुरक्षित स्थानों पर ही रहने की सलाह दी गई थी। लेकिन तेजी से बदलते हालात और संभावित खतरे को देखते हुए अब सरकार ने अपनी रणनीति बदलते हुए लोगों को देश छोड़ने की सलाह दी है।

अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता

दरअसल, स्थिति तब और गंभीर हो गई जब Donald Trump ने ईरान को लेकर कड़ी चेतावनी दी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सैन्य कार्रवाई की आशंका ने पूरे क्षेत्र में डर का माहौल बना दिया। इसी वजह से भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

कितने भारतीय फंसे

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के समय ईरान में करीब 9,000 भारतीय मौजूद थे। इनमें छात्र, कामगार और प्रोफेशनल्स शामिल थे। राहत की बात यह है कि अब तक लगभग 1,800 लोग सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी नागरिकों को भी निकालने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।

सीजफायर के बावजूद क्यों बरकरार है खतरा?

हालांकि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन वहां के हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। ऐसे में भारत सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और नागरिकों को पहले से ही सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है।

कैसे शुरू हुआ पूरा संघर्ष?

ये तनाव 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त कार्रवाई की। इसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

सरकार की अपील

भारत सरकार ने नागरिकों से खास अपील की है कि वो किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें। साथ ही, सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए सतर्क रहना ही इस समय सबसे जरूरी है।

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