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Independence Day 2025: स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने की परंपरा, जाने कब और कैसे हुई शुरू

Independence Day 2025: 15 अगस्त के दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें लहराती दिखना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं यह परंपरा कब शुरू हुई और क्यों निभाई जाती है? स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाना सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आजादी और देशभक्ति का एक खास प्रतीक माना जाता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 11, 2025 पर 11:22 AM
Independence Day 2025: स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने की परंपरा, जाने कब और कैसे हुई शुरू
Independence Day 2025: 15 अगस्त से पहले बाजारों में तिरंगे और रंग-बिरंगी पतंगों की दुकानों पर भीड़ उमड़ती है।

स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त का दिन सिर्फ लाल किले पर तिरंगा फहराने और परेड देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में एक जश्न का माहौल लेकर आता है। खासकर उत्तर भारत के कई शहरों में इस दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। सुबह से ही गलियों, मोहल्लों और छतों पर लोग पतंगबाजी का आनंद लेने के लिए जुट जाते हैं। दिल्ली, चांदनी चौक, पुरानी दिल्ली और लखनऊ जैसे शहरों में तो 15 अगस्त पर पतंग उड़ाना एक खास परंपरा बन चुका है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी मिलकर पतंग उड़ाते हैं, मांझा लूटते हैं और आसमान में अपनी पतंग को सबसे ऊंचा उड़ाने की होड़ में लग जाते हैं।

ये नजारा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आजादी की भावना, एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। जैसे तिरंगा आसमान में लहराता है, वैसे ही पतंगें भी स्वतंत्रता की उड़ान का संदेश देती हैं।

क्यों जुड़ी पतंग से आजादी की कहानी

पतंग उड़ाने की परंपरा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि आजादी के संघर्ष की याद भी है। इसका सिलसिला 1928 से शुरू हुआ, जब साइमन कमीशन के विरोध में स्वतंत्रता सेनानियों ने पतंगों पर साइमन गो बैक” लिखकर उन्हें उड़ाया। काली पतंगें ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विरोध का मजबूत प्रतीक बन गईं और आसमान भी स्वतंत्रता की पुकार में शामिल हो गया।

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