यूपी के सहारनपुर की मिट्टी में ऐसी मिठास घुली है कि यहां के बागों से उठती आम की खुशबू दूर-दूर तक पहचान बन गई है। खास बात ये है कि सहारनपुर को लोग सिर्फ आम के बागों की वजह से नहीं जानते, बल्कि यहां के “लंगड़ा आम” ने तो इस इलाके को दुनिया के नक्शे पर एक अलग ही पहचान दी है। कहते हैं जिसने एक बार लंगड़ा चखा, वो बाकी आमों का स्वाद भूल जाता है। पकने के बाद भी हरे रंग में रहने वाला यह आम अपनी अनोखी खुशबू और रसीले स्वाद से दिल जीत लेता है।
गर्मी के मौसम में जब सहारनपुर के बाग लंगड़ा आम से लद जाते हैं, तो दूर-दूर से लोग इसे लेने आते हैं। हर साल टनों आम यहां से देश-दुनिया में पहुंचते हैं। यूं ही नहीं इसे आमों का राजा कहा जाता, इसके पीछे है स्वाद का वो जादू जो हर जुबान पर बस जाता है!
कहानी करीब 250-300 साल पुरानी है। वाराणसी के एक शिव मंदिर में एक पुजारी रहते थे, जो चलने-फिरने में कमजोर थे। लोग उन्हें प्यार से “लंगड़ा पुजारी” कहकर बुलाते थे। उसी पुजारी ने अपने आश्रम में एक आम का पेड़ लगाया था।
बच्चों की शरारत ने बनाया लंगड़ा आम
कहते हैं बच्चे उस पेड़ पर लगे आम तोड़ने के लिए पत्थर मारते थे। पुजारी जी डंडा लेकर दौड़ पड़ते। ये मजेदार किस्सा पूरे इलाके में मशहूर हो गया। सब लोग उस पेड़ के आम को मजाक में “लंगड़े वाला आम” कहने लगे।
इस बात की खबर राजा तक पहुंची। राजा ने खुद उस आम को मंगवाया और चखा। स्वाद इतना लाजवाब कि राजा ने उसी लंगड़े पुजारी के नाम पर इस आम को “लंगड़ा आम” नाम दे दिया। राजा ने नए पेड़ तैयार करवा कर इसे पूरे इलाके में फैलाया।
सहारनपुर से देश-दुनिया तक सफर
आज यही लंगड़ा आम सहारनपुर की पहचान बन चुका है। यहां से हर सीजन में टनों आम देश के कोने-कोने और विदेशों तक भेजे जाते हैं। खास बात ये है कि पकने के बाद भी इसका रंग हरा रहता है और सुगंध तो ऐसी कि मुंह में पानी ला दे!