अभय सिंह, जिन्हें लोग IIT बाबा के नाम से जानते हैं, एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका नया जीवन फैसला है। संन्यास और आध्यात्म की राह पर चलने वाले अभय ने अब अपनी जिंदगी की दिशा बदलते हुए गृहस्थ जीवन को अपनाने का फैसला लिया है। प्रयागराज महाकुंभ 2025 में अपने अलग अंदाज, शांत व्यक्तित्व और रुद्राक्ष धारण किए रूप के कारण उन्होंने लोगों का खास ध्यान खींचा था। उनकी बोलचाल, खासकर धाराप्रवाह अंग्रेजी और गहरी सोच, उन्हें आम साधुओं से अलग बनाती थी।
अब शादी के बाद अभय सिंह का ये नया रूप लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय तक वैराग्य का जीवन जीने के बाद उनका ये फैसला कई लोगों को हैरान कर रहा है, तो वहीं कुछ इसे जीवन के स्वाभाविक बदलाव के रूप में देख रहे हैं। उनकी ये नई शुरुआत आध्यात्म और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन की एक अलग मिसाल पेश कर सकती है।
महाशिवरात्रि पर रचाई शादी
अभय सिंह ने 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर हिमाचलप्रदेश के अघंजर महादेव मंदिर में प्रतीका के साथ सात फेरे लिए। उनकी पत्नी प्रतीका कर्नाटक के बैंगलूरु की रहने वाली एक इंजीनियर हैं। दोनों फिलहाल धर्मशाला में रहकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं।
शादी के बाद अभय सिंह अपनी पत्नी के साथ हिसार पहुंचे, जहां वर्षों बाद उनका परिवार से मिलन हुआ। मां शीला देवी ने बेटे और बहू का गर्मजोशी से स्वागत किया। ये पल उनके जीवन का बेहद भावुक और खास क्षण रहा, जिसने उनकी नई शुरुआत को और भी यादगार बना दिया।
इंजीनियरिंग से अध्यात्म तक का सफर
अभय सिंह ने IIT Bombay से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और विदेश में नौकरी भी की। लेकिन दर्शनशास्त्र और जीवन के गहरे सवालों ने उन्हें आध्यात्म की ओर मोड़ दिया। Socrates और Plato जैसे विचारकों को पढ़ते-पढ़ते उन्होंने जीवन का नया अर्थ खोजा और संन्यास का रास्ता चुन लिया।
अब साथ मिलकर आगे बढ़ाएंगे सनातन का संदेश
पत्नी प्रतीका के अनुसार, अभय बेहद सरल और सच्चे इंसान हैं। दोनों की मुलाकात एक साल पहले हुई थी और अब वे मिलकर आध्यात्म और सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प ले चुके हैं। भविष्य में वे “सनातन यूनिवर्सिटी” जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर भी काम करने की योजना बना रहे हैं, जिससे उनका यह नया सफर और भी खास बन सकता है।