Full Moon Ghee: नितिन कामत के निवेश वाले स्टार्टअप की सोशल मीडिया पर हुई किरकिरी, वेबसाइट से नदारद हुआ प्रोडक्ट
वैसे तो Two Brothers Organic Farms अकेले ऐसी कंपनी या स्टार्टअप नहीं है, जो फुल मून घी प्रोडक्ट बेच रही है। कई अन्य भी इस तरह के घी की बिक्री कर रहे हैं। पिछले साल स्टार्टअप ने नितिन कामत की नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन रेनमैटर फाउंडेशन के नेतृत्व में 58.2 करोड़ रुपये जुटाए थे
सोशल मीडिया यूजर्स को स्टार्टअप के दावे हजम नहीं हो रहे हैं।
आपने 'चौदहवीं का चांद' तो सुना होगा लेकिन क्या 'पूर्णिमा का घी' सुना है। पुणे का एक एग्रीटेक स्टार्टअप अपने खास "फुल मून घी" के लिए सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दावा है कि इस घी को हर पूर्णिमा पर उस रात के आसमान की एनर्जी और पॉजिटिविटी को ग्रहण करने के लिए तैयार किया जाता है, यानि कि साल में केवल 12 बार। इस घी के 500 मिलीलीटर जार की कीमत 2,495 रुपये है।
एक और दिलचस्प बात यह है कि इस घी को बनाने वाले स्टार्टअप 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स' में जीरोधा के को-फाउंडर और सीईओ नितिन कामत का पैसा लगा हुआ है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स ने नितिन कामत की नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन रेनमैटर फाउंडेशन के नेतृत्व में 58.2 करोड़ रुपये जुटाए थे।
स्टार्टअप के फुल मून घी ने अपने अनोखे मार्केटिंग आइडिया के कारण एक्स पर चर्चा छेड़ दी है। वैसे तो टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स अकेले ऐसी कंपनी या स्टार्टअप नहीं है, जो फुल मून घी प्रोडक्ट बेच रही है। कई अन्य भी इस तरह के घी की बिक्री कर रहे हैं। एक और दिलचस्प बात यह है कि जिस फुल मून घी को लेकर डिबेट छिड़ी है, वह टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स की वेबसाइट से नदारद है।
क्या दावा कर रहा है स्टार्टअप
जहां तक बात टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स की है तो स्टार्टअप ने अपनी वेबसाइट पर इस घी को लेकर दावा किया था, "एक दुर्लभ खजाना, जिसे केयर और ट्रेडिशन के साथ तैयार किया गया है। हमारा फुल मून कल्चर्ड घी किसी हेल्थ वंडर से कम नहीं है। मुक्त चराई वाली गिर गायों के दूध से बना यह घी, पूर्णिमा के बढ़ते चरण पर मथा जाता है, जो रात के आसमान की एनर्जी और पॉजिटिविटी को अपने में समाहित कर लेता है।"
साइट पर टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स के को-फाउंडर सत्यजीत हांगे का एक वीडियो भी था, जिसमें वह कहते हैं, "लैक्टोज फ्री फुल मून घी एक सेंसरी एक्सपीरियंस है। यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक अमृत है, जो साल में केवल 12 बार बनाया जाता है। यह मुक्त-चरने वाली गिर गायों के A2 दूध से बनाया जाता है।"
"हम इस दूध को लेते हैं, इसे दही में बदल देते हैं, और फिर सुबह 4 से 6 बजे के बीच हम इस दही को मक्खन बनाने के लिए मथते हैं, जिसे लकड़ी पर पिघलाया जाता है। और यह सब पूर्णिमा पर होता है।" वेबसाइट के मुताबिक, पूर्णिमा के दौरान प्रोडक्ट बनाने से इसकी ताकत भी बढ़ जाती है।
सोशल मीडिया यूजर्स को हजम नहीं हो रहे दावे
सोशल मीडिया यूजर्स को स्टार्टअप के ये दावे हजम नहीं हो रहे हैं। डॉक्टर और हेल्थ एजुकेटर डॉ. नंदिता अय्यर ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि "पूर्णिमा" का इस्तेमाल केवल उनके प्रोडक्ट को अधिक महंगा बनाने की एक मार्केटिंग स्ट्रैटेजी है। उनकी पोस्ट पर एक अन्य X यूजर, आनंद शंकर ने कमेंट किया, 'यह तमाशा पिछले कुछ वर्षों से चल रहा है।' एक दूसरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'वे बहुत अच्छा काम करते हैं। दुर्भाग्य से, यह एक काम शर्मनाक है।"
अय्यर ने एक रिप्लाई में लिखा है, 'उन्हें कुछ स्टैंडर्ड कायम रखने की जरूरत है, यह ग्राहक को मूर्ख बनाने जैसा है।' एक दूसरे यूजर ने पोस्ट किया है, 'उन्हें पीई इनवेस्टमेंट को जस्टिफाई करना है।' एक और यूजर का कहना है, 'मैं एक गौशाला चलाता हूं और हम गाय का घी बनाते हैं। मैं आपको बता सकता हूं कि कोई फुल मून घी या ब्रह्ममूर्त घी नहीं है। हम सिर्फ इतना बढ़ावा देते हैं कि हमारी गाय स्वस्थ रहें, बछड़ों को अच्छा खाना खिलाएं।
वहीं कुछ यूजर्स की राय अलग है। एक एक्स यूजर ने लिखा है, 'शायद हम पहले आयुर्वेद ग्रंथों से पता कर सकते हैं कि क्या इस प्रैक्टिस का कोई रेफरेंस है? हम जानते हैं कि मून बाथिंग के फायदे हैं जैसे ठंडक और शांति, खासकर उच्च पित्त वाले व्यक्ति के लिए। एक और यूजर ने भी ऐसी ही बात कही है, 'क्या आप पृथ्वी पर चंद्रमा के भूगर्भीय प्रभाव को भी नकारेंगे? ज्वार? मैं सहमत हूं कि यह छद्म विज्ञान है। हालांकि हो सकता है कि चांद की रोशनी वास्तव में मंथन को प्रभावित करती हो, जिससे यह फायदेमंद हो? ठीक वैसे ही जैसे सूरज की रोशनी हमारे प्राकृतिक D3 को प्रभावित करती है?
रेडिट पर भी यूजर्स 'टू ब्रदर्स ऑर्गेनिक फार्म्स' के फुल मून घी और इसकी कीमत को आड़े हाथों ले रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है, 'ओके, मैं "हाफ मून घी" बेच रहा हूं, रात के आसमान की आधी पॉजिटिविटी मिलेगी।' एक दूसरे यूजर ने लिखा है, 'चूना, चूना'।