Parle-G बिस्किट का ‘G’, जीनियस नहीं, असली मतलब है कुछ और, देखें डिटेल्स

Parle-G: अगर आप भी सोचते हैं कि पार्ले-जी के पैकेट पर लिखा ‘G’ का मतलब ‘जीनियस’ है, तो आप थोड़े भ्रम में हैं। असल में इसका मतलब कुछ और ही है। आइए जानते हैं इस मजेदार और दिलचस्प राज के बारे में, जो पार्ले-जी के इतिहास और नाम के पीछे छिपा हुआ है

अपडेटेड Jan 17, 2026 पर 4:22 PM
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Parle-G: आजादी के बाद बाजार में कई और कंपनियों ने 'ग्लुको' नाम से बिस्किट बेचना शुरू कर दिया.

बचपन की यादों की बात हो और पार्ले-जी का नाम न आए, ऐसा होना लगभग नामुमकिन है। चाय के प्याले में डुबोकर खाया जाने वाला यह बिस्किट न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि बच्चों और बड़ों दोनों के लिए ऊर्जा का भी बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसकी मिठास, हल्की कुरकुराहट और हर घर में आसानी से मिलने वाला पैकेट इसे खास बनाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया कि पार्ले-जी के पैकेट पर लिखा ‘G’ आखिर का मतलब क्या है? ज्यादातर लोग इसे ‘Genius’ समझते हैं और यही वजह है कि बच्चों और युवाओं में इसके प्रति आकर्षण और भी बढ़ जाता है। मगर असली कहानी इससे भी रोचक है

Parle G की शुरूआत और इतिहास

पार्ले कंपनी की नींव 1929 में पड़ी थी, लेकिन बिस्किट बनाने का काम 1939 में शुरू हुआ। उस समय इसका नाम ‘Parle Gluco’ रखा गया था। इसका मकसद था लोगों को स्वादिष्ट और एनर्जी से भरपूर बिस्किट देना। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसका क्रेज और बढ़ गया। भारतीय और ब्रिटिश सैनिक इसे बहुत पसंद करते थे क्योंकि ये ताजगी और ऊर्जा का अच्छा स्रोत था।


नाम बदलने की कहानी

आजादी के बाद बाजार में कई कंपनियों ने ‘Gluco’ नाम से बिस्किट बेचना शुरू कर दिया, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो गया कि असली पार्ले वाला बिस्किट कौन सा है। इसे अलग पहचान देने के लिए पार्ले कंपनी ने 1980 के दशक में इसका नाम छोटा करके ‘Parle-G’ रख दिया।

G का असली मतलब

दरअसल, ‘G’ का मतलब ग्लुकोज (Glucose) था। ये बिस्किट शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाले ग्लुकोज से भरपूर था। हालांकि, 2000 के आसपास कंपनी ने इसे प्रमोट करने के लिए एक टैगलाइन दी – ‘G for Genius’। तभी लोगों के मन में ये बैठ गया कि ‘G’ का मतलब जीनियस है। लेकिन वास्तविकता में ये हमेशा ग्लुकोज के लिए ही था।

आज भी क्यों है सबसे पसंदीदा

महंगाई और बदलते समय के बावजूद पार्ले-जी ने अपनी कीमत को आम आदमी की पहुंच में रखा। आज भी 5 रुपये का पैकेट हर शहर और गांव में आसानी से मिल जाता है। यही कारण है कि इसे भारतीय बिस्किट का राजा कहा जाता है। स्वाद, एनर्जी और सस्ती कीमत – यही तीन कारण हैं कि पार्ले-जी आज भी बच्चों, युवाओं और बड़ों की पहली पसंद बना हुआ है।

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