Pema Khandu: सिर्फ 36 साल की उम्र में अरुणाचल के सीएम बन गए पेमा खांडू, आखिर कैसे निर्विरोध जीत जाते हैं चुनाव? जानें- ताकत
Pema Khandu: पेमा खांडू ने 17 जुलाई, 2016 को पहली बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभाला था। तब से वे इस पद पर बने हुए हैं। इस तरह उन्होंने सीएम के तौर पर 10 साल पूरे कर लिए हैं। साल 2019 में उन्होंने दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली थी। खांडू ने 13 जून 2024 को लगातार तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली
Pema Khandu: पेमा खांडू ने 17 जुलाई 2016 को 36 साल की उम्र में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी
Pema Khandu: अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू इस समय देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं। अरुणाचल प्रदेश के सीएम के तौर पर तीसरी बार शपथ लेने के बाद पेमा खांडू पूर्व सीएम गेगोंग अपांग के बाद सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता भी बन गए हैं। खांडू ने 17 जुलाई, 2016 को पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर पदभार संभाला था। तब से वे इस पद पर बने हुए हैं। इस तरह उन्होंने सीएम के तौर पर 10 साल पूरे कर लिए हैं।
सिर्फ 37 साल में बन गए सीएम
साल 2019 में उन्होंने दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली थी। खांडू ने 13 जून 2024 को लगातार तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। दिवंगत मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के बेटे पेमा 37 साल में देश में सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे। पेमा खांडू ने 2011 और 2014 में मुक्तो विधानसभा सीट से निर्विरोध विधानसभा चुनाव जीता था।
उन्होंने साल 2024 के अरुणाचल चुनाव में भी मुक्तो सीट से निर्विरोध जीत हासिल की थी। यह उनकी तीसरी निर्विरोध जीत थी। वे 2011 में अपने पिता के निधन के बाद मुक्तो सीट से पहली बार विधायक बने थे। तब से वे लगातार इस सीट से जीत रहे हैं।
खांडू का सियासी सफर
खांडू ने नबाम तुकी के इस्तीफे के बाद पहली बार सीएम का पदभार संभाला था। वह पहली बार कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे। पेमा खांडू सहित BJP के 10 प्रत्याशी निर्विरोध विधायक चुने गए थे। राज्य में BJP का नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के साथ गठबंधन है।
अपने परिवार के सबसे बड़े बेटे पेमा दिल्ली के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएट हैं। अपने पिता की मृत्यु के बाद वह शासन में जल्दी ही एंट्री कर गए थे। पेमा तवांग के रहने वाले हैं। अपने पिता के निधन से खाली हुई सीट को भरते हुए उन्होंने साल 2011 में पहली बार अरुणाचल प्रदेश विधानसभा में दस्तक दी।
क्यों जीत जाते हैं निर्विरोध
मुक्तो (एसटी) सुरक्षित सीट से विधायक के रूप में वह निर्विरोध चुने गए थे। इसके बाद जल्द ही उन्हें कैबिनेट मंत्री के तौर पर अरुणाचल सरकार में शामिल कर लिया गया था। आम चुनाव के बाद तुकी सरकार में उन्हें एक जून 2014 को शहरी विकास मंत्री के रूप में शामिल किया था। हालांकि, उन्होंने बाद में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और बागी कालिखो पुल के साथ चले गए थे।
खांडू के नेतृत्व में सभी विधायक BJP की सहयोगी पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) में शामिल हो गए। हालांकि, बाद में पीपीए ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। खांडू के साथ के विधायक BJP में शामिल हो गए। फिर पेमा खांडू ने भी PPA से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।
2019 के विधानसभा चुनाव में भगवा पार्टी ने अरुणाचल प्रदेश में शानदार जीत हासिल की। फिर पेमा खांडू मुख्यमंत्री बन गए। 60 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए वह दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। फिर 13 जून, 2024 को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल तथागत रॉय ने पेमा खांडू को तीसरी बार पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस वक्त मुश्किल में हैं खांडू
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अप्रैल को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया कि अरुणाचल प्रदेश में सरकारी कार्यों के ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजन के स्वामित्व वाली कथित कंपनियों को दिए जाने के मामले में वह दो सप्ताह में प्रारंभिक जांच करे। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आदेश के तहत राज्य में 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और कार्य आदेशों के आवंटन और उनके क्रियान्वयन की जांच की जाए।
पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह इस मामले में 16 सप्ताह में अपनी स्थिति रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे। जस्टिस नाथ ने आदेश सुनाते हुए कहा, "सीबीआई इस निर्णय की तारीख से दो सप्ताह में प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज करेगी और कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।" शीर्ष अदालत ने 17 फरवरी को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्या है आरोप?
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पिछले 10 वर्ष में अरुणाचल प्रदेश में लगभग 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके और कार्य आदेश मुख्यमंत्री खांडू के परिजन से जुड़ी चार कंपनियों को दिए गए। याचिकाकर्ता एनजीओ 'सेव मोन रीजन फेडरेशन' और 'वॉलंटरी अरुणाचल सेना' की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामे का हवाला देते हुए दलील दी कि कई ठेके मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली कंपनियों को दिए गए।
पिछले साल दो दिसंबर को शीर्ष अदालत ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को मुख्यमंत्री के परिजन की कंपनियों को दिए गए ठेकों समेत 2015 से 2025 तक दिए गए सभी ठेकों के बारे में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा था। इस जनहित याचिका (PIL) में पेमा खांडू को पक्षकार बनाया गया है।
पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रेमा और उनके भतीजे त्सेरिंग ताशी को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। दोरजी खांडू 2007 से लेकर अप्रैल 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन होने तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। याचिका में दावा किया गया है कि ड्रेमा की कंपनी 'ब्रांड ईगल्स' को हितों के स्पष्ट टकराव के बावजूद बड़ी संख्या में सरकारी ठेके दिए गए।