Pongal 2026 Date: पोंगल दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला एक प्रमुख कृषि पर्व है। चार दिनों तक चलने वाला ये त्योहार सूर्य देव के साथ ही अच्छी फसल और खेती-बाड़ी में मदद करने वाले मवेशियों के प्रति आभार जताने का अवसर होता है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिल नाडु में ये पर्व लगभग उसी समय मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायण होते हैं और मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है।
यह देश भर के अन्य कृषि आधारित त्योहारों के साथ मनाया जाता है, जिसमें मकर संक्रांति और माघ बिहू शामिल हैं। यह साल का वह समय होता है जब गन्ना, हल्दी और चावल जैसी फसलें काटी जाती हैं। इस महीने को शादियों और सभी धार्मिक कार्यक्रमों के लिए शुभ माना जाता है। नए साल में इसकी शुरुआत 15 जनवरी 2026 को होगी और ये 18 जनवरी तक मनाया जाएगा। आइए जानें पोंगल के पर्व का महत्व और मुहूर्त
पोंगल के दिन सूर्योदय (15 जनवरी, 2026): सुबह 6:34 बजे शुरू होगा
पोंगल प्रसाद चढ़ाने का सबसे अच्छा समय : सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक
तमिल में, 'पोंगु' का मतलब है 'उठना' या 'उमड़ना', और यही विचार पोंगल त्योहार के केंद्र में है। उत्सव के दौरान, चावल और दूध को एक सुंदर ढंग से सजाए गए मिट्टी के बर्तन में तब तक पकाया जाता है जब तक वे उबलकर बाहर न आ जाएं। इसे विकास, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने का भी प्रतीक है। इसे बहुत शुभ माना जाता है। इसलिए पोंगल में सूर्य भगवान की पूजा करते हैं।
पोंगल 2026 की तारीख और समय
पहला और सबसे महत्वपूर्ण दिन थाई पोंगल है, जिसमें सूर्य की पूजा करते हैं और सक्कराई पोंगल का पारंपरिक व्यंजन उन्हें अर्पित किया जाता है।
पोंगल का दूसरा दिन मट्टू पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन कृषि में काम आने वाले पशुओं की पूजा की जाती है। पशुओं को नहलाया जाता है, सजाया जाता है और अच्छा खाना खिलाया जाता है। इस तरह किसान खेती में उनकी मदद और योगदान का आभार प्रकट करते हैं। मट्टू पोंगल तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू से भी जुड़ा हुआ है।
पोंगल के तीसरे और आखिरी दिन कानम पोंगल होता है। इस दिन, पूरा परिवार एक साथ उत्सव भोज करता है। इसे पोंगल भोजनम कहत हैं, जिसे नई उपज से पकाया जाता है।