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Snake Venom: यह सांप गर्मी, बारिश और ठंड में अलग-अलग तरह का फेंकता है जहर, देखते ही हो जाएं सावधान

Russell's Viper Snake Venom: दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में रसेल वाइप की गिनती होती है। यह सांप पलक झपकते ही अपने शिकार का काम तमाम कर देता है। ऐसे जहरीले सांपों के नाम से ही कई लोगों की डर के मारे रूह कांप उठती है। कहते हैं कि मौसम के हिसाब से इस सांप का जहर बदलता रहता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 13, 2025 पर 11:53 AM
Snake Venom: यह सांप गर्मी, बारिश और ठंड में अलग-अलग तरह का फेंकता है जहर, देखते ही हो जाएं सावधान
Russell's Viper Snake Venom: रसेल वाइपर को दबौया सांप के नाम से जाना जाता है। यह दक्षिण एशिया में पाए जाने वाले वाइपरिडे परिवार का काफी विषैला सांप है।

दुनियाभर में बहुत से ऐसे लोग हैं, जो सांप के नाम से थर-थर कांपने लगते हैं। मौत के घाट उतार देने वाले जहर से भरे इन रेंगने वाले जीवों से इंसान तो इंसान जंगल के जंगली जानवर भी खौफ खाते हैं। कहा जाता है कि एक बार सांप अगर भड़क गया तो फिर अपने शिकार की हालत पतली कर देता है। हालांकि, भारत में बहुत कम जहरीले सांप पाए जाते हैं। फिर भी सांपों से सतर्क रहने की जरूरत है। वैसे भी सांप को देखते ही आमतौर पर लोगों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। ऐसे ही रसेल वाइपर नाम का सांप है। इसका जहर मौसम के हिसाब से बदलता रहता है।

रसेल वाइपर को दबौया सांप के नाम से जाना जाता है। यह दक्षिण एशिया में पाए जाने वाले वाइपरिडे परिवार का काफी विषैला सांप है। इसका नाम पैट्रिक रसेल के नाम पर रखा गया है। यह भारत के चार बड़े सांपों में से एक है। इसका सिर चपटा, त्रिकोणीय और गर्दन से अलग होता है। थूथन कुंद, गोल और उठा हुआ होता है। नथुने बड़े होते हैं। यह सांप जिस अंग में काटता है। वहां सूजन आ जाती है। इसके साथ ही तेज दर्द होने लगता है। इसके काटने के 20 मिनट बाद पीड़ित के थूंक में खून के लक्षण दिख सकते हैं। पीड़ित का बीपी कम होने लगता है। हार्ट की गति भी कम होने लगती है।

रसेल वाइपर सांप मौसम के हिसाब से फेंकता है जहर

PLOS Neglected Tropical Diseases जर्नल में छपी एक स्टडी के रिपोर्ट के मुताबिक तापमान और बारिश जैसे मौसमी कारकों का सीधा असर रसेल्स वाइपर के जहर पर पड़ता है. यानी कि किसी सूखे जगह पर काटे गए रसेल्स वाइपर के लक्षण किसी नम इलाके में काटे गए से अलग होते हैं। भारत के 34 अलग-अलग इलाकों से 115 रसेल्स वाइपर के जहर के सैंपल लेकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के इवोल्यूशनरी वेनॉमिक्स लैब में एनालिसिस किया गया है। जिसके बाद पाया गया कि जिन इलाकों में बारिश कम होती है और तापमान ज्यादा रहता है। वहां के सांपों के जहर में टॅाक्सिन की मात्रा ज्यादा होती है। इसके अलावा जहां नमी और बारिश ज़्यादा होती है, वहां के सांपों के जहर का कॉम्पोजिशन अलग होता है।

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