Snow Moon Feb 2026: फरवरी में आ रहा है स्नो मून, जानें क्यों पड़ा फरवरी की पूर्णिमा के चांद का ये नाम और क्या है इसकी तारीख?

Snow Moon Feb 2026: फरवरी के महीने में आने वाली पूर्णिमा के चांद को स्नो मून के नाम से जाता है। इसका ये नाम सदियों पहले दिया गया था। इसके इस नाम के साथ रोचक इतिहास जुड़ा हुआ है। आइए जानें इस इतिहास और स्नो मून की तारीख के बारे में

अपडेटेड Jan 31, 2026 पर 11:53 AM
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स्नो मून 1 फरवरी की रात को अपनी पूरी चमक के साथ दिखाई देगा।

Snow Moon Feb 2026: फरवरी का महीना खगोल शास्त्र या चांद-सितारों में दिलचस्पी रखने वालों के बहुत खास होने वाला है। इस महीने की शुरुआत स्नो मून से होगी और बीच में सूर्य ग्रहण का दुर्लभ नजारा भी देखने को मिलेगा। फिलहाल बात करते हैं स्नो मून की। फरवरी में पड़ने वाली पूर्णिमा के चांद को सदियों पहले ‘स्नो मून’ नाम दिया गया था। इस नाम के साथ रोचक इतिहास जुड़ा है, जिसका जिक्र ‘द ओल्ड फार्मर्स अल्मनैक’ में 1760 के दशक में मिलता है। चमकीले सफेद नजर आने वाले पूर्णिमा के इस चांद को ‘हंगर मून’ और ‘स्टॉर्म मून’ के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानें इसे स्नो मून क्यों कहा जाता है? क्या इस चांद के साथ बर्फबारी होती है या कोई और रोचक इतिहास जुड़ा है इससे?

‘स्नो मून’ नाम क्यों पड़ा?

फरवरी की पूर्णिमा के चांद के स्नो मून नाम के साथ दिलचस्प और पुराना इतिहास है। यह नाम सदियों पुरानी लोक-परंपराओं से जुड़ा है। उत्तरी अमेरिका में फरवरी में भारी बर्फबारी होती है। इसी कारण वहां रहने वाले लोगों ने स्नो मून नाम दिया। 1760 के दशक में एक खोजकर्ता और लेखक जॉनाथन कार्वर ने ‘द ओल्ड फार्मर्स अल्मनैक’ नाम के अपने यात्रा-विवरणों में इसके बारे में बताया है। उन्होंने लिखा कि इस समय बर्फ इतनी ज्यादा होती थी कि शिकार और यात्रा करना बेहद मुश्किल हो जाता था। इसलिए लोगों ने चंद्रमा को मौसम और प्रकृति से जोड़कर नाम देना शुरू किया। इसी तरह हर महीने की पूर्णिमा के नाम रखे गए, जैसे वुल्फ मून, हार्वेस्ट मून और फरवरी की पूर्णिमा के चांद को नाम दिया गया स्नो मून।

कब दिखेगा स्नो मून?

इस साल 1 फरवरी को माघ पूर्णिमा है। इसी पूर्णिमा के चांद को ‘स्नो मून’ कहा जा रहा है। स्नो मून 1 फरवरी की रात को अपनी पूरी चमक के साथ दिखाई देगा। शाम 5:09 बजे इसकी चमक सबसे तेज होगी और सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में इसे उगते हुए देखा जा सकेगा। सूर्यास्त के बाद स्नो मून चरम पर होगा और एकदम दूधिया रंग का नजर आएगा।

क्यों खास है यह खगोलीय घटना?


स्नो मून सिर्फ एक पूर्णिमा नहीं है, बल्कि यह बताता है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने आकाशीय घटनाओं को अपने जीवन और मौसम से जोड़कर समझा। फरवरी की इस रात, जब ठंड और सन्नाटा हो, तब आसमान में चमकता स्नो मून हमें कुछ पल रुककर प्रकृति की खूबसूरती को महसूस करने का मौका देता है।

स्नो मून देखने के लिए उपकरण की जरूरत नहीं

स्नो मून देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होती। यह नंगी आंखों से भी साफ दिखाई देता है। फिर भी अगर आपके पास दूरबीन या टेलीस्कोप है, तो आप चंद्रमा की सतह और बेहतर तरीके से देख सकते हैं।

स्नो मून देखने का सबसे अच्छा समय

इसे देखने के लिए सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के आसपास का है, जब चंद्रमा पूर्व दिशा से उगता है। कोशिश करें कि आप खुले स्थान पर हों जहां रोशनी कम हो। अंधेरे में इसकी चमक बेहतरीन होगी।

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