Surya Grahan 2026 Date: साल 2026 में भी पिछले साल की तरह चार ग्रहण होंगे, जिसकी शुरुआत फरवरी 2026 में सूर्य ग्रहण के साथ होगी। साल का पहला सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे रिंग ऑफ फायर कहते हैं। यह फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि को लगेगा। खगोल शास्त्र में दिलचस्पी रखने वाले सभी लोगों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण घटना है। बता दें, सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को लगता है, जबकि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगता है। साल के पहले सूर्य ग्रहण की तारीख और समय के बारे में जानने के साथ लोग ये भी जानना चाहते हैं कि इसे भारत में देखा जा सकेगा या नहीं? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए आगे पढ़ें।
2026 में साल के पहले सूर्य ग्रहण की तारीख
पंचांग के अनुसार, साल का पहला सूर्य ग्रहण फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि, जो 17 फरवरी को होगी। इस सूर्य ग्रहण में सूर्य का 96% हिस्सा चंद्रमा से ढक जाएगा।
17 फरवरी को सूर्य ग्रहण का प्रारंभ भारतीय समयानुसार शाम को 5 बजकर 26 मिनट पर होगा। यह सूर्य ग्रहण 2 घंटे 31 मिनट तक रहेगा।
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना, चिली, तंजानिया, नामीबिया, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक, मेडागास्कर और बोत्सवाना में देखा जा सकेगा। इनके अलावा यह अंटार्कटिका, मॉरीशस, साउथ जॉर्जिया, ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र और फ्रांसीसी दक्षिणी क्षेत्र में भी दिखाई देगा।
साल का पहला सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसे रिंग ऑफ फायर कहते हैं। इसमें रिंग ऑफ फायर 2 मिनट 20 सेकेंड तक रहेगा। खगोल शास्त्र के अनुसार, वलयाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के 96% हिस्से को ढक देता है, जिससे सूर्य के किनारे दिखाई देते हैं, सूर्य पूरी तरह से नहीं ढकता। इस वजह से सूर्य ग्रहण के समय आकाश में एक चमकीला गोलाकार वलय बनेता है। इसे ही रिंग ऑफ फायर कहा जाता है। बता दें, सूर्य ग्रहण के समय पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाता है, जिससे उसकी पूरी रोशनी धरती तक नहीं पहुंच पाती। वलयाकार ग्रहण में चंद्रमा धरती से सबसे अधिक दूरी पर होता है, इसी वजह से वह सूरज को पूरी तरह से नहीं ढक पाता है और उसके चारों को एक आग का घेरा बन जाता है।
साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इस वजह से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसलिए सूतक काल के नियमों का पालन नहीं करना होगा।