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जिस हाथी के बच्चे को तीस्ता नदी में डूबने से बचाया गया जब वो अपनी मां से मिला तो इमोशनल करने वाला था नजारा

तीस्ता नदी की तेज धारा में एक नन्हा हाथी झुंड से बिछड़कर बह रहा था। उसकी जान बचाने के लिए पांच मछुआरों ने बिना अपनी परवाह किए नाव दौड़ा दी। करीब चार किलोमीटर तक पीछा करने के बाद उन्होंने बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद वन विभाग की मदद से उसे उसकी मां तक पहुंचाया गया

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Sep 22, 2026 पर 1:19 PM
जिस हाथी के बच्चे को तीस्ता नदी में डूबने से बचाया गया जब वो अपनी मां से मिला तो इमोशनल करने वाला था नजारा
बच्चे की जान बचने के बाद वन विभाग के सामने अगली चुनौती थी उसे उसकी मां तक पहुंचाना।

तीस्ता नदी की तेज धारा में एक नन्हा हाथी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था। झुंड से बिछड़कर वह कई किलोमीटर तक बह गया और हर पल उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा था। तभी नदी में मछली पकड़ रहे मछुआरों की नजर उस पर पड़ी। बिना देर किए उन्होंने अपनी नावें हाथी के बच्चे की ओर मोड़ दीं। उफनती लहरों और तेज बहाव के बीच करीब चार किलोमीटर तक उसका पीछा किया गया। आखिरकार मछुआरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन इसके बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, उसे उसकी मां से मिलाना।

चार किलोमीटर तक मौत से लड़ते रहे मछुआरे

घटना जलपाईगुड़ी की है। गजोल्डोबा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद तीस्ता नदी का बहाव तेज था। इसी दौरान हाथियों का एक झुंड अपलचंद जंगल की काथांबारी रेंज के पास नदी पार कर रहा था। तेज धारा में नन्हा हाथी अपनी मां और झुंड से अलग हो गया। नॉर्थ बंगाल फिशरमेन फोरम से जुड़े मछुआरे नदी में मौजूद थे, तभी उन्हें बच्चे के चिंघाड़ने की आवाज सुनाई दी। पानी में संघर्ष करते बच्चे को देखकर उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना नाव उसकी ओर मोड़ दी।

लहरों को चीरकर बच्चे तक पहुंची नाव

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