तीस्ता नदी की तेज धारा में एक नन्हा हाथी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा था। झुंड से बिछड़कर वह कई किलोमीटर तक बह गया और हर पल उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा था। तभी नदी में मछली पकड़ रहे मछुआरों की नजर उस पर पड़ी। बिना देर किए उन्होंने अपनी नावें हाथी के बच्चे की ओर मोड़ दीं। उफनती लहरों और तेज बहाव के बीच करीब चार किलोमीटर तक उसका पीछा किया गया। आखिरकार मछुआरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। लेकिन इसके बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, उसे उसकी मां से मिलाना।
