सांस की नली में फंसा लोहे का स्क्रू… बिना ऑपरेशन डॉक्टरों ने किया ऐसा कमाल!

राजस्थान के उदयपुर में डॉक्टरों ने कमाल कर दिखाया, जहां 17 वर्षीय युवक की सांस की नली में फंसा 32 एमएम का स्क्रू बिना ऑपरेशन निकाला गया। बिना बेहोश किए की गई इस प्रक्रिया ने न सिर्फ युवक की जान बचाई, बल्कि आधुनिक तकनीक की ताकत भी साबित कर दी

अपडेटेड Apr 30, 2026 पर 10:28 AM
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ये घटना तब हुई जब युवक सुथारी (कारपेंट्री) का काम कर रहा था।

राजस्थान के उदयपुर से एक हैरान कर देने वाला मेडिकल मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और आधुनिक तकनीक के दम पर एक 17 साल के युवक की जान बचा ली। युवक की सांस की नली में 32 एमएम लंबा लोहे का स्क्रू फंस गया था, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। आमतौर पर ऐसे मामलों में ऑपरेशन या मरीज को बेहोश करना जरूरी होता है, लेकिन यहां डॉक्टरों ने बिना सर्जरी और बिना एनेस्थीसिया के ही इस समस्या का समाधान कर दिया।

इस पूरी प्रक्रिया में न केवल जोखिम कम रहा, बल्कि मरीज को जल्दी राहत भी मिल गई। ये सफलता न सिर्फ डॉक्टरों की कुशलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अब सरकारी अस्पतालों में भी अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए गंभीर मामलों का इलाज संभव हो गया है।

काम के दौरान बनी जानलेवा गलती


ये घटना तब हुई जब युवक सुथारी (कारपेंट्री) का काम कर रहा था। काम के दौरान गलती से उसने स्क्रू निगल लिया, जो सीधे उसके दाएं फेफड़े की श्वास नली में जाकर अटक गया। इसके बाद युवक को लगातार खांसी, सीने में तेज दर्द और खून के साथ बलगम आने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं।

समय पर अस्पताल पहुंचना

परिजनों ने बिना देर किए युवक को अस्पताल पहुंचाया। जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर मानते हुए तुरंत इलाज की योजना बनाई और अगले ही दिन प्रक्रिया करने का फैसला लिया।

बिना ऑपरेशन अपनाई गई हाईटेक तकनीक

लोकल 18 के रिपोर्ट के मुताबीक आमतौर पर ऐसे मामलों में सर्जरी या मरीज को बेहोश करके रिजिड ब्रोंकोस्कोपी करनी पड़ती है, लेकिन यहां डॉक्टरों ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे बिना चीर-फाड़ और बिना एनेस्थीसिया के स्क्रू को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।

डॉक्टरों की टीमवर्क

सहायक प्रोफेसर डॉ. महेश माहिच के मुताबीक, ये केस बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि स्क्रू फेफड़े की नली में गहराई तक फंसा हुआ था। जरा सी चूक मरीज की जान पर भारी पड़ सकती थी। लेकिन अनुभवी टीम ने बेहद सावधानी और सटीकता के साथ इस जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया।

सरकारी अस्पतालों की क्षमता का बड़ा उदाहरण

कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि बिना सर्जरी और जनरल एनेस्थीसिया के ऐसा केस संभालना डॉक्टरों की उच्च दक्षता को दर्शाता है। वहीं सीनियर प्रोफेसर डॉ. महेंद्र कुमार बैनाड़ा के मार्गदर्शन में पूरी टीम ने इस सफलता को संभव बनाया।

कम जोखिम, तेज रिकवरी

डॉक्टरों के मुताबिक, फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी तकनीक न केवल सुरक्षित है, बल्कि इससे मरीज जल्दी ठीक भी हो जाता है। फिलहाल युवक की हालत स्थिर है और वो तेजी से स्वस्थ हो रहा है।

नई उम्मीद की कहानी

ये घटना साबित करती है कि अब सरकारी अस्पताल भी आधुनिक तकनीकों के दम पर जटिल से जटिल मामलों को आसानी से संभाल सकते हैं। उदयपुर के इस अस्पताल ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि सही इलाज और अनुभवी हाथों में हर मुश्किल आसान हो सकती है।

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