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आज के जमाने की East India Company हैं Google जैसी कंपनियां, इस कारण Zoho के फाउंडर ने कहा ऐसा

Again East India Company: गूगल (Google) की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) ने महज 24 घंटे में ही $3200 करोड़ जुटा लिए। ऐसे में जोहो कॉरपोरेशन के को-फाउंडर श्रीधर वेंबू (Sridhar Vembu) ने एक बार फिर वैश्विक टेक कंपनियों की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) से की है। जानिए क्या है इसका मतलब और इससे पहले उन्होंने ऐसी तुलना क्यों की थी?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Feb 15, 2026 पर 2:16 PM
आज के जमाने की East India Company हैं Google जैसी कंपनियां, इस कारण Zoho के फाउंडर ने कहा ऐसा
जोहो कॉरपोरेशन के को-फाउंडर श्रीधर वेंबू (Sridhar Vembu) ने एक बार फिर वैश्विक टेक कंपनियों की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) से की है।

जोहो कॉरपोरेशन के को-फाउंडर श्रीधर वेंबू (Sridhar Vembu) ने एक बार फिर वैश्विक टेक कंपनियों की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) से की है। उनका कहना है कि आज की बड़ी टेक कंपनियां वित्तीय और रणनीतिक शक्ति के मामले में कई सोवरेन देशों के समान हो चुकी है, बल्कि कई देशों से तो अधिक ही हो चुकी है। जोहो (Zoho) के को-फाउंडर ने ये बातें 14 फरवरी को X (पूर्व नाम Twitter) पर कही। उन्होंने कहा कि इसे समझने का सही तरीका 'ईस्ट इंडिया कंपनी' है। बता दें कि कुछ हफ्ते पहले भी उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से की थी। ईस्ट इंडिया कंपनी से तुलना का मतलब है कि बड़ी टेक कंपनियां न सिर्फ मार्केट को बल्कि अपनी आर्थिक शक्ति से भू-राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है।

Zoho के फाउंडर ने फिक क्यों किया जिक्र?

श्रीधर वेंबू ने एक बार फिर बड़ी टेक कंपनियों को एक फिर से ईस्ट इंडिया कंपनी ऐसे समय में कही है, जब वैश्विक टेक कंपनियों के साइज, कैपिटल स्ट्रेंथ और जियो-पॉलिटिकल असर को लेकर बहस तेज हो रही है। उन्होंने X पर एक ट्वीट के रिस्पांस में इसका जिक्र किया है। इस ट्वीट में गूगल (Google) की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) की 24 घंटे में $3200 करोड़ का कर्ज जुटाने की तुलना इतना ही पैसा सरकारों को जुटाने में लगने वाले समय से की गई है। तुलना में इस बात का भी जिक्र है कि अल्फाबेट ने 100 साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी किए जबकि भारत के सोवरेन बॉन्ड आमतौर पर 40 साल तक के लिए होते हैं। श्रीधर के मुताबिक यह उदाहरण दिखाता है कि इस उदाहरण से बड़ी टेक कंपनियों के पास कितनी बड़ी वित्तीय ताकत है और वे कितनी तेजी और पैमाने पर पूंजी जुटा सकते हैं।

पहले कब की थी ईस्ट इंडिया कंपनी से तुलना

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