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5 नवंबर की शाम Supermoon के साथ, मौका नहीं चूकना है तो याद कर लें तारीख और समय

Supermoon ऐसी खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा धरती के सबसे करीब होता है। इस दिन पूर्णिमा होती है और चंद्रमा आम दिनों या साल की किसी अन्य पूर्णिमा के मुकाबले अधिक बड़ा नजर आता है। चंद्रमा धरती का प्राकृतिक उपग्रह है, जो उसके चक्कर लगाता है। इसी क्रम में ये खगोलीय घटना होती है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Nov 03, 2025 पर 10:38 AM
5 नवंबर की शाम Supermoon के साथ, मौका नहीं चूकना है तो याद कर लें तारीख और समय
ये नजारा 5 नवंबर बुधवार की रात दिखाई देगा, जब साल का सबसे करीबी सुपरमून रूबरू होगा।

Supermoon: नवंबर में एक ऐसी खगोलीय घटना घटने जा रही है जिसे शायद ही कोई चूकना चाहेगा। कम से कम चांद और खगोलीय बातों में दिलचस्पी रखने वाले लोग तो बिलकुल नहीं। नवंबर के महीने में साल 2025 का सबसे बड़ा सुपरमून नजर आने वाला है। इसे देखने के लिए आपको बहुत इंतजार करने की भी जरूरत नहीं है। ये नजारा 5 नवंबर बुधवार की रात दिखाई देगा, जब साल का सबसे करीबी सुपरमून शाम 5.11 बजे रूबरू होगा। इस दौरान चांद थोड़ा बड़ा और ज्यादा चमकीला दिखाई देगा। बता दें, साल 2025 में लगातार तीन सुपरमून होंगे। इसमें से पहला अक्टूबर पर हो चुका है और दूसरा 5 नवंबर को होने वाला है, जो साल का सबसे बड़ा और करीबी सुपरमून होगा। साल का तीसरा और अंतिम सुपरमून 5 दिसंबर 2025 को होगा।

कब और क्यों होता है सुपरमून

पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की कक्षा पूरी तरह से वृत्ताकार नहीं है, इसलिए जैसे-जैसे यह चांद धरती की परिक्रमा करता है, यह नजदीक और दूर होता जाता है। सुपरमून तब होता है जब पूर्णिमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के ज़्यादा नजदीक होती है।

3.75 लाख किमी रह जाएगी धरती से चंद्रमा की दूरी

5 नवंबर का सुपरमून इस साल के तीन सुपरमून में से दूसरा और सबसे नजदीकी भी है। चांद पृथ्वी से लगभग 222,000 मील (357,000 किलोमीटर) की दूरी पर होगा। लोवेल वेधशाला के खगोलशास्त्री लॉरेंस वासरमैन ने कहा कि सुपरमून के दौरान ज्वार थोड़ा ज्यादा हो सकता है क्योंकि चांद पृथ्वी के ज्यादा नजदीक होता है। लेकिन यह अंतर ज्यादा ध्यान देने योग्य नहीं होता।

सुपरमून में 14% बड़ा होता है चांद

नासा के अनुसार, इससे चांद साल के सबसे धुंधले चांद की तुलना में 14% बड़ा और 30% ज्यादा चमकीला दिखाई देता है। अगर आसमान साफ हो तो सुपरमून देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती। लेकिन चंद्रमा के आकार में बदलाव को नंगी आंखों से पहचानना मुश्किल हो सकता है।

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