पूरी दुनिया का ध्यान इन दिनों मिडिल ईस्ट में चल रही जंग पर है, लेकिन इससे भी पहले दक्षिण एशिया में भारत के दो पड़ोसी मुल्कों में के बीच जंग शुरू हो चुकी थी और अभी भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। हम बात कर रहे हैं- पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष की, दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 48 घंटों में पाकिस्तान की तरफ से अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में 270 से ज्यादा रॉकेट और तोप के गोले दागे गए हैं।
कुनार प्रांत के सूचना और संस्कृति विभाग के निदेशक जियाउर्रहमान स्पिन घर ने हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रांत के कई इलाकों में गोलाबारी हुई है। हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव 21 फरवरी से बढ़ा हुआ है। उस दिन पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हवाई हमले किए थे और कथित तौर पर तालिबान से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया था।
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन से आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) सक्रिय हैं और वहीं से पाकिस्तान में हमले करते हैं। दूसरी तरफ अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।
तालिबान की जवाबी कार्रवाई
पाकिस्तान के हवाई हमलों के बाद अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने भी जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद से दोनों देशों की सीमा पर लगातार झड़पें, ड्रोन हमले और गोलाबारी की घटनाएं हो रही हैं।
दोनों देश एक-दूसरे पर सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
पाकिस्तान ने फिर तेज किए हवाई हमले
इसी हफ्ते पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में फिर से अपने हवाई हमले तेज कर दिए। पाकिस्तानी खुफिया सूत्रों के मुताबिक इन हमलों का मकसद तालिबान और TTP से जुड़े बड़े ठिकानों को निशाना बनाना था।
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के कई अहम ठिकानों पर हमले किए। इनमें कंधार एयरपोर्ट, पक्तिया प्रांत में सैन्य ठिकाने और राजधानी काबुल के कुछ इलाके शामिल बताए जा रहे हैं।
हमलों के बाद तालिबान अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इन हमलों का जवाब जरूर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पहले से ही उग्रवादी गतिविधियों के लिए संवेदनशील क्षेत्र रही है और अब लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से यहां संकट और गहरा सकता है।