अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच, ईरान सरकार ने देश के भीतर मौजूद अपने दुश्मनों और विद्रोहियों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है। शनिवार को ईरान ने 'पीपुल्स मुजाहिदीन ऑफ ईरान' (MEK) संगठन से जुड़े दो और लोगों को फांसी पर लटका दिया। ईरान इस संगठन को एक आतंकवादी गुट मानता है, जो सरकार को उखाड़ फेंकने की कोशिश कर रहा है।
कौन थे ये लोग और क्या थे आरोप?
फांसी पर लटकाए गए व्यक्तियों की पहचान अबुलहसन मोंताजर और वाहिद बानियामेरियन के रूप में हुई है।
विद्रोह की साजिश: ईरान की अदालत के अनुसार, इन दोनों को "आतंकवादी गतिविधियों के जरिए विद्रोह करने" का दोषी पाया गया था।
गिरफ्तारी और सजा: इन्हें जनवरी 2024 में गिरफ्तार किया गया था और दिसंबर 2025 में इनकी मौत की सजा पर अंतिम मुहर लगी थी। MEK संगठन ने भी इन दोनों की फांसी की पुष्टि की है।
फांसी का सिलसिला: कोई ढिलाई नहीं
शनिवार की यह घटना ईरान में हाल के दिनों में दी गई फांसी की लंबी कड़ी का हिस्सा है। ईरान सरकार उन सभी लोगों को निशाना बना रही है जिन्हें वह 'देश का दुश्मन' मानती है। इसी हफ्ते MEK से जुड़े 4 और लोगों को पहले ही मौत की सजा दी जा चुकी है।
पिछले गुरुवार को एक व्यक्ति को इस आरोप में फांसी दी गई कि वह विरोध प्रदर्शनों के दौरान अमेरिका और इजरायल के इशारे पर काम कर रहा था।
मार्च में तीन अन्य लोगों को पुलिसकर्मियों की हत्या के जुर्म में लटकाया गया था। वहीं, इजरायल के लिए जासूसी करने वाले एक स्वीडिश-ईरानी नागरिक को भी फांसी दी गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की काफी आलोचना हुई।
युद्ध के साये में 'अंदरूनी सफाई'
यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब 28 फरवरी से ईरान, अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे युद्ध में उलझा हुआ है।
MEK संगठन का दावा है कि सरकार युद्ध में अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए राजनीतिक कैदियों और विरोधियों को मार रही है।
ईरान की शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने साफ कर दिया है कि देश के अंदर मौजूद गद्दारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
विरोध के लिए कोई जगह नहीं: सीधी धमकी
ईरान के सरकारी अधिकारियों और टीवी एंकरों के तेवर बेहद सख्त हैं। सरकारी टीवी पर एक एंकर ने सीधा संदेश देते हुए कहा:
"जब इस विद्रोह की धूल शांत होगी, तो हम एक-एक को गर्दन से पकड़ेंगे। हम तुम्हारी माताओं को रुला देंगे।"
इसके अलावा, विदेश में रहने वाले ईरानियों को भी चेतावनी दी गई है कि वे दुश्मन के बहकावे में आकर देश के खिलाफ कुछ न बोलें। न्यायपालिका ने धमकी दी है कि अगर वे विरोध में शामिल पाए गए, तो ईरान में मौजूद उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।