Sheikh Hasina News: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अदालत की अवमानना के मामले में बुधवार (2 जुलाई) को इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने छह महीने की जेल की सजा सुनाई। 'ढाका ट्रिब्यून' अखबार ने बताया कि जज मोहम्मद गुलाम मुर्तजा मजूमदार की अध्यक्षता में इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल-1 की तीन सदस्यीय पीठ ने यह फैसला जारी किया। इसी फैसले में अदालत ने गैबांधा में गोबिंदगंज के शकील अकंद बुलबुल को दो महीने जेल की सजा सुनाई।
बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना 11 महीने पहले बांग्लादेश से भागकर भारत आई थीं। प्रधानमंत्री पद से हटने और 11 महीने पहले देश छोड़ने के बाद पहली बार अवामी लीग की नेता शेख हसीना को किसी मामले में सजा सुनाई गई है।
इससे पहले 17 जून को आईसीटी ने दो प्रमुख बांग्लादेशी अखबारों में नोटिस प्रकाशित कर शेख हसीना और असदुज्जामान खान कमाल को 24 जून तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। नोटिस के अनुसार, इंटरनेशनल क्राइम्स (ट्रिब्यूनल-1) रूल्स ऑफ प्रोसीजर 2010 (संशोधित), 2025 की धारा 31 के तहत उन्हें 24 जून को ट्राइब्यूनल में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया जाता है। अन्यथा, 1973 के एक्ट की धारा 10A के अंतर्गत मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चलाया जाएगा।
1 जून को अभियोजन पक्ष द्वारा तीनों पर हत्या, हत्या के प्रयास, यातना और घातक हथियारों के इस्तेमाल जैसे संगीन अपराधों का आरोप लगाया गया। अदालत ने आरोपों को संज्ञान में लेते हुए शेख हसीना और असदुज्जामान खान कमाल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था। उसी दिन अब्दुल्ला अल-मामून को गिरफ्तार किया गया था।
आवामी लीग ने फैसले का किया विरोध
शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने ट्रिब्यूनल द्वारा शुरू की गई इन कार्यवाहियों की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे एक शो ट्रायल (फर्जी मुकदमा) बताया है। अवामी लीग के मुताबिक, कथित तौर पर गैर-निर्वाचित और अलोकतांत्रिक सरकार के नेतृत्व में मोहम्मद यूनुस द्वारा संचालित किया जा रहा है।
बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए मुकदमे की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। आवामी लीग का कहना है कि वर्तमान प्रशासन के कई अधिकारी पहले ही सार्वजनिक रूप से शेख हसीना को दोषी करार दे चुके हैं, जिससे न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता संदिग्ध हो गई है।
1 जुलाई को शेख हसीना ने अपने वकील के जरिए मानवता के खिलाफ अपराध करने के आरोपों से इनकार किया था। अभियोजकों ने उनके खिलाफ उकसाने, भड़काने, मिलीभगत, सुविधा और साजिश तथा सामूहिक हत्या को रोकने में विफलता के संबंध में पांच आरोप दायर किए। ये बांग्लादेशी कानून के तहत मानवता के खिलाफ अपराध के बराबर हैं।
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, पिछले साल जुलाई और अगस्त के बीच 1,400 लोग मारे गए थे, जब हसीना की सरकार ने सत्ता पर काबिज होने के असफल प्रयास में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया था। अगस्त में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के चरम पर हसीना भारत भाग आईं। अभी वह भारत में ही रह रही हैं।