बांग्लादेश एक बार फिर हिंसा की चपेट में है। इस बार मामला एक बड़े छात्र नेता और शेख हसीना के मुखर आलोचक रहे शरीफ उस्मान हादी की हत्या से जुड़ा है, जिसके खिलाफ गुरुवार देर रात लोग सड़कों पर उतर आए और आगजनी और तोड़फोड़ कर दी। इस दौरान बांग्लादेश के दो बड़े मीडिया हाउस के दफ्तरों को भी आग के हवाले कर दिया गया। 32 सास के हादी की गुरुवार को सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गई।
12 दिसंबर को मोटरसाइकिल पर सवार नकाबपोश हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी, जब वह रिक्शा में बैठ रहे थे। उन्हें इलाज के लिए 15 दिसंबर को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।
हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में रातोंरात दंगे भड़क उठे, जिनमें आगजनी और भारत विरोधी आक्रोश देखने को मिला, मीडिया को निशाना बनाया गया।
ये सब ऐसे समय हो रहा है, जब 2024 के विद्रोह के बाद एक दिन पहले ही देश में आम चुनाव की तारीखों का ऐलान किया गया। इन चुनाव में हादी एक निदर्लीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे।
हिंसक प्रदर्शन और दफ्तर के अंदर फंसे पत्रकार
गुरुवार देर रात और शुक्रवार तड़के हादी की मौत की खबर फैलते ही, उनके सैकड़ों समर्थक न्याय और हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए ढाका की सड़कों पर उतर आए।
फायर ब्रिगेड और नागरिक सुरक्षा बल के एक प्रवक्ता ने AFP को बताया कि राजधानी में आगजनी की कम से कम तीन घटनाएं सामने आईं, जिनमें बांग्लादेश के प्रमुख अखबारों- द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों में लगी आग भी शामिल है।
प्रदर्शनकारियों के समूहों ने दोनों अखबारों के कार्यालयों पर धावा बोल दिया और परिसर में तोड़फोड़ करने के बाद इमारतों के कुछ हिस्सों में आग लगा दी। धुआं ऑफिस में भर जाने से पत्रकार और कर्मचारी अंदर फंस गए।
डेली स्टार की रिपोर्टर जायमा इस्लाम ने जलती हुई इमारत में फंसी रहने के दौरान अपना खौफना अनुभव साझा किया। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, "मैं सांस नहीं ले पा रही हूं। बहुत धुआं है। मैं अंदर फंसी हुई हूं। तुम मुझे मार रहे हो।"
डेली स्टार के 27 कर्मचारी फंसे थे
अधिकारियों ने बताया कि डेली स्टार कार्यालय में लगी आग पर करीब 1.40 बजे काबू पा लिया गया, लेकिन उस समय भी 27 कर्मचारी अंदर ही फंसे हुए थे। डेली स्टार के रिपोर्टर अहमद दीप्तो ने AFP को बताया, "हमने इमारत के पिछले हिस्से में शरण ली और हमें गुस्साए लोग नारे लगाते हुए सुनाई दे रहे थे।"
एक पत्रकार ने bdnews24 को बताया कि कर्मचारियों को फोन करके चेतावनी दी गई थी कि भीड़ अखबार के दफ्तर की ओर बढ़ रही है। जब न्यूज रूम के कर्मचारियों ने नीचे जाने की कोशिश की, तो उन्होंने देखा कि भीड़ ने पहले ही निचली मंजिलों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी थी।
25 पत्रकारों का किया गया रेस्क्यू
बताया जाता है कि नाइट शिफ्ट के कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए छत पर भाग गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, कावरान बाजार कार्यालय पर हुए हमले के बाद चार घंटे के भीतर कम से कम 25 पत्रकारों को बचाया गया।
दमकलकर्मियों ने सीढ़ियों की मदद से लोगों को बचाया, जबकि बाद में इमारतों के आसपास सेना की टुकड़ियों को तैनात किया गया। BBC बांग्ला को एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "सैकड़ों लोग यहां जमा हुए थे और उन्होंने हमला किया।"
बाद में इलाके को सुरक्षित करने के लिए सेना तैनात की गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पहले प्रोथोम आलो कार्यालय में तोड़फोड़ की और फिर द डेली स्टार की इमारत में आग लगा दी।
यह साफ नहीं हो पाया कि अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस को अप्रत्यक्ष समर्थन देने वाले इन दोनों अखबारों को क्यों निशाना बनाया गया। टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में यूनुस ने शुक्रवार को मस्जिदों में विशेष प्रार्थनाओं की घोषणा की और शनिवार को शोक दिवस घोषित किया।
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