पड़ोसी देश बांग्लादेश में मंगलवार को एक नए युग की शुरुआत हुई। 17 साल का वनवास काटकर लौटे तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। यह पल बांग्लादेश के इतिहास के लिए बेहद खास है, क्योंकि दशकों बाद वहां की राजनीति से 'बेगमों' (शेख हसीना और खालिदा जिया) का दबदबा खत्म हुआ है।
ढाका के 'जातीय संसद भवन' के साउथ प्लाजा में आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने तारिक रहमान को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण से पहले ही बीएनपी (BNP) संसदीय दल ने उन्हें अपना नेता चुन लिया था।
35 साल बाद मिला 'पुरुष प्रधानमंत्री'
बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह एक बड़ा बदलाव है। पिछले 35 सालों से बांग्लादेश की सत्ता या तो शेख हसीना के पास थी या तारिक रहमान की मां खालिदा जिया के पास। तारिक रहमान 35 साल में बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बने हैं। वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं।
भारत की ओर से ओम बिरला हुए शामिल
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में जो खिंचाव आया था, उसे कम करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत की तरफ से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शामिल हुए। यह संकेत है कि नई दिल्ली नई सरकार के साथ मजबूत रिश्ते बनाने के लिए तैयार है।
चुनाव में मिली 'बंपर' जीत
12 फरवरी को हुए आम चुनावों में तारिक रहमान की पार्टी BNP ने एकतरफा जीत हासिल की है।
कुल 300 सीटों वाली संसद में BNP ने अकेले 151 से ज्यादा सीटें जीतीं। बीएनपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कुल 212 सीटों पर कब्जा जमाया। तारिक रहमान अब अगले 5 साल तक प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करेंगे।
तारिक रहमान की नई कैबिनेट: प्रमुख चेहरे और उनके मंत्रालय
तारिक रहमान की नई कैबिनेट में 25 मंत्रियों को शामिल किया गया है, जिसमें अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों और अल्पसंख्यक समुदाय को भी जगह दी गई है।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट में संतुलन बनाने की कोशिश की है। यहां कुछ महत्वपूर्ण नाम और उनके संभावित विभाग दिए गए हैं:
अल्पसंख्यक समुदायों को प्रतिनिधित्व
तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट में विविधता का संदेश देने के लिए दो प्रमुख अल्पसंख्यक नेताओं को भी शामिल किया है:
तारिक रहमान ने साफ किया है कि उनकी नई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून व्यवस्था को बहाल करना और देश में संवैधानिक सुधार करना होगी।