CIA के 'मास्टर प्लान' से गच्चा खा गए ईरानी! 'नामुमकिन मिशन' को अमेरिकी कमांडोज ने कैसे दिया अंजाम? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी
F-15E Rescue Operation: इस ऑपरेशन में केवल ताकत ही नहीं, बल्कि दिमाग का भी इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने ईरान के भीतर यह झूठी खबर फैला दी कि अमेरिकी सेना ने अपने जवान को पहले ही बचा लिया है और वह ईरान से बाहर जा चुका है। इस धोखे के कारण ईरानी सर्च टीमें भ्रमित हो गईं और उनकी आपसी तालमेल बिगड़ गई, जिससे अमेरिकी कमांडो को कीमती समय मिल गया
ईरान की पथरीली पहाड़ियों और दुश्मन की घेराबंदी के बीच अमेरिकी जांबाज कमांडो ने मौत को मात देकर अपने साथी को सुरक्षित बाहर निकाला
US Rescue Mission Inside Iran: ईरान की सरजमीं पर अमेरिका ने आज एक ऐसा कारनामा करके दिखाया है जो सदियों तक याद रखा जाएगा। अमेरिकी स्पेशल कमांडोज की टीम ने दुश्मन के घर में क्रैश हुए F-15E फाइटर जेट के क्रू को घंटों के सर्च ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाल लिया है। यह कोई हॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध के इतिहास का सबसे खतरनाक और जटिल 'रेस्क्यू मिशन' रहा।
ईरान की पथरीली पहाड़ियों और दुश्मन की घेराबंदी के बीच अमेरिकी जांबाज कमांडो ने मौत को मात देकर अपने साथी को सुरक्षित बाहर निकाला। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी खोज और बचाव अभियान' करार दिया है। आइए आपको बताते हैं इस हैरतअंगेज ऑपरेशन की पूरी इनसाइड स्टोरी।
दुश्मन की सरजमीं पर 'क्रैश लैंडिंग'
3 अप्रैल को ईरान के हवाई क्षेत्र में मिशन पर तैनात एक अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को ईरानी सेना ने निशाना बनाया। विमान आग के गोले में तब्दील हो गया और उसके दोनों क्रू मेंबर्स एक पायलट और एक वेपन्स सिस्टम ऑफिसर को जेट से इजेक्ट करना पड़ा। पायलट को तो कुछ ही घंटों के भीतर एक सीक्रेट ऑपरेशन में बचा लिया गया, लेकिन असली चुनौती दूसरा क्रू मेंबर था। वह घायल था, उसके पास बचाव का सामान बहुत कम था और वह दक्षिण-पश्चिमी ईरान के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों में अकेला फंसा था। रिटायर्ड मेजर जनरल मार्क मैककार्ली ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा कि वह एयरमैन अकेले उन ईरानियों से बचने की कोशिश कर रहा था, जिन्हें उसे पकड़ने के लिए भारी इनाम का लालच दिया गया था।
मौत और जिंदगी के बीच एक 'अंधी रेस'
जैसे ही विमान गिरा, दो सेनाओं के बीच एक अनोखी रेस शुरू हो गई। एक तरफ अमेरिकी सेना अपने जवान को बचाने के लिए जमीन-आसमान एक किए हुए थी, तो दूसरी तरफ ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) उस एयरमैन को जिंदा पकड़ने के लिए पहाड़ों की खाक छान रही थी। दोनों पक्ष एक ही जोन की ओर बढ़ रहे थे, जिससे यह ऑपरेशन रफ्तार, खुफिया जानकारी और मारक क्षमता का मुकाबला बन गया।इस मिशन में सबसे अहम भूमिका निभाई एक एक बीकन और सुरक्षित संचार उपकरण ने। यह छोटा सा डिवाइस लगातार एयरमैन की लोकेशन वाशिंगटन के कमांड सेंटर और व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम तक पहुंचा रहा था, जहां राष्ट्रपति ट्रंप खुद हर पल की खबर ले रहे थे।
जब आसमान से होने लगी 'आग की बारिश'
जब अमेरिकी खुफिया तंत्र को पता चल कि ईरानी काफिले एयरमैन के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, तब 'आसमान से रास्ता साफ करने' का आदेश दिया गया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और MQ-9 रीपर ड्रोनों ने ईरानी काफिलों पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। एक सैन्य अधिकारी ने इसे 'आग की मूसलाधार बारिश' बताया, जिसका मकसद उस एयरमैन के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाना और उसे निकालने के लिए रास्ता साफ करना था।
जैसे ही अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के सैकड़ों कमांडो और दर्जनों हेलीकॉप्टर जमीन पर उतरे, वहां मौजूद ईरानी सैनिकों के साथ भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। यह मिशन इसलिए भी ज्यादा जोखिम भरा था क्योंकि आम तौर पर ऐसे रेस्क्यू रात में होते हैं, लेकिन यह ऑपरेशन दिन के उजाले तक खिंच गया, जिससे पकड़े जाने का खतरा कई गुना बढ़ गया था।
CIA के 'मास्टर प्लान' से गच्चा खा गए ईरानी!
इस ऑपरेशन में केवल ताकत ही नहीं, बल्कि दिमाग का भी इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने ईरान के भीतर यह झूठी खबर फैला दी कि अमेरिकी सेना ने अपने जवान को पहले ही बचा लिया है और वह ईरान से बाहर जा चुका है। इस धोखे के कारण ईरानी सर्च टीमें भ्रमित हो गईं और उनकी आपसी तालमेल बिगड़ गई, जिससे अमेरिकी कमांडो को कीमती समय मिल गया।
जब फेल होते-होते बचा मिशन
सफलता के करीब पहुंचने पर एक बड़ा संकट आया। एयरमैन को निकालने के लिए तैनात किए गए दो अमेरिकी विमान एक सुदूर ईरानी बेस पर फंस गए। कमांडरों ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए जवानों को रेस्क्यू करते हुए फंसे हुए विमानों को वहीं नष्ट कर दिया गया ताकि वे दुश्मन के हाथ न लगें। दो दिनों तक मौत को चकमा देने के बाद, आखिरकार उस घायल एयरमैन को सुरक्षित निकाल लिया गया।
एक्सपर्ट्स ने बताया आधुनिक युद्ध का 'चमत्कार'
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह मिशन आधुनिक युद्ध के हर तकनीक का मिश्रण था। इसमें स्टील्थ इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग, हवाई श्रेष्ठता, जमीनी मुकाबला और मनोवैज्ञानिक युद्ध का बेहतरीन तालमेल दिखा। पहाड़ों की चोटियों पर सक्रिय दुश्मन के बीच दो दिनों तक बिना रसद के टिके रहना किसी चमत्कार से कम नहीं था। बावजूद इसके कि अमेरिका ने इस संघर्ष में अपने कई विमान खोए, लेकिन 'किसी भी साथी को पीछे न छोड़ने' की अमेरिकी जिद ने इस 'नाममुकिन' मिशन को मुमकिन कर दिखाया।
छुपाया गया पहला मिशन: ट्रंप
रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि पहले पायलट का रेस्क्यू 3 अप्रैल को ही कर लिया गया था, लेकिन उसे तब तक गुप्त रखा गया जब तक कि दूसरा एयरमैन सुरक्षित नहीं निकल गया। पहले रेस्क्यू में भी अमेरिका को भारी चुनौती मिली थी। ईरानी गोलाबारी में एक ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और एक A-10 विमान क्षतिग्रस्त हो गए थे।