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बांग्‍लादेश : बंपर जीत के बाद BNP नेता का बड़ा बयान, शेख हसीना को लेकर भारत से कर दी ये मांग

Sheikh Hasina : चुनाव आयोग के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के गठबंधन ने 212 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं उसके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, इस्लामिक नेतृत्व वाले जमात ए इस्लामी गठबंधन को 77 सीटें मिली हैं। इन नतीजों के बाद 60 वर्षीय तारिक रहमान के बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावना है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 13, 2026 पर 6:05 PM
बांग्‍लादेश : बंपर जीत के बाद BNP नेता का बड़ा बयान, शेख हसीना को लेकर भारत से कर दी ये मांग
Sheikh Hasina: BNP ने कहा, भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने (प्रत्यर्पण) की मांग करेगी

बांग्लादेश चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाली बीएनपी ने कहा है कि शेख हसीना को वापस लाने का मुद्दा भारत के सामने उठाया जाएगा।  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने शुक्रवार को कहा कि वह औपचारिक तौर पर भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस भेजने (प्रत्यर्पण) की मांग करेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने ढाका में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि BNP कानून के तहत उनके प्रत्यर्पण के लिए दबाव बनाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला बांग्लादेश और भारत के विदेश मंत्रालयों के बीच का है। साथ ही उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि शेख हसीना को बांग्लादेश लौटाकर उनके खिलाफ मुकदमे का सामना करने दिया जाए।

शेख हसीना को लेकर भारत से कर दी बड़ी मांग

यह बयान ऐसे समय आया है जब BNP ने गुरुवार को हुए चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी की अगुवाई तारिक रहमान कर रहे हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्रीखालिदा जिया के बेटे हैं। यह चुनाव 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद पहला मतदान था। इसी आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था।

मीडिया से बातचीत में सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि चुनाव परिणाम जनता की इच्छा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब जिम्मेदारियां पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी पार्टी लोगों की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी और देश की बड़ी उम्मीदों को पूरा करने की पूरी कोशिश करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश अब अपने पड़ोसी देशों, खासकर भारत के साथ बराबरी और दोस्ती के आधार पर संबंध रखना चाहता है। 78 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपनी सरकार गिरने के बाद भारत चली गई थीं। उन्हें नई दिल्ली का करीबी माना जाता था। पिछले नवंबर में एक अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी।

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