Brigadier Ahmad Vahidi: ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद तेहरान ने अपनी सैन्य शक्ति को फिर से संगठित करना शुरू कर दिया है। इन हमलों में न केवल सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई, बल्कि 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) के चीफ मोहम्मद पाकपुर भी मारे गए। इस बड़े सैन्य संकट के बीच, ईरान ने अपने सबसे अनुभवी और रणनीतिकार कमांडर अहमद वाहिदी को IRGC का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया है। जहां एक ओर पूरे ईरान में 40 दिनों के शोक का ऐलान किया गया है, वहीं वाहिदी की नियुक्ति ने साफ कर दिया है कि ईरान अब 'इतिहास के सबसे बड़े पलटवार' की तैयारी में है।
अहमद वाहिदी का असली नाम वाहिद शाहचरागी है, जो ईरान के सैन्य और राजनीतिक गलियारों में एक बेहद रसूखदार नाम हैं। वाहिदी IRGC की उस 'कुद्स फोर्स' के कमांडर रह चुके हैं, जो विदेशों में गुप्त ऑपरेशंस और क्षेत्रीय नेटवर्क जैसे- हिजबुल्लाह और हमास को संभालने का काम करती है। वे ईरान के रक्षा मंत्री और गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। दिसंबर 2025 में ही उन्हें IRGC का डिप्टी कमांडर बनाया गया था। वे उन चुनिंदा लोगों में से हैं जिन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नींव रखी थी।
वाहिदी को ईरान की 'असममित युद्ध रणनीति' (Asymmetric Warfare) का जनक माना जाता है। इसके तहत सीधे युद्ध के बजाय छोटे, घातक और अचानक हमलों जैसे- ड्रोन, मिसाइल और प्रॉक्सी वार से दुश्मन को कमजोर किया जाता है। उनकी विशेषज्ञता के कारण ही ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों का एक मजबूत जाल बुना है।
बदले की आग और वाहिदी की चुनौती
अहमद वाहिदी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान का पूरा नेतृत्व ढांचा हिल चुका है। उनके सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां हैं-
प्रतिशोध का नेतृत्व: IRGC ने पहले ही 'इतिहास के सबसे भीषण हमले' की धमकी दी है, जिसकी पूरी प्लानिंग अब वाहिदी के हाथों में होगी।
सैन्य मनोबल: अपने सर्वोच्च नेता और पूर्व चीफ को खोने के बाद बिखरी हुई सेना को फिर से एकजुट करना।
क्षेत्रीय गठबंधन: लेबनान, सीरिया और यमन में फैले ईरान के सहयोगी समूहों को एक साथ लाकर अमेरिका-इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोलना।