पाकिस्तान को कह दिया आतंकवादी देश, तो 10 साल की हुई जेल! कौन हैं महिला वकील ईमान मजारी?

मजारी-हजीर और उनके पति को इस्लामाबाद पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट जाते समय गिरफ्तार कर लिया। दोनों एक ऐसे मामले की सुनवाई में जा रहे थे, जो सोशल मीडिया पर किए गए विवादित पोस्ट से जुड़ा था। इन पोस्ट में कई ताकतवर सरकारी संस्थानों की आलोचना की गई थी

अपडेटेड Jan 27, 2026 पर 5:43 PM
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पाकिस्तान को कह दिया आतंकवादी देश, तो 10 साल की हुई जेल! कौन हैं महिला वकील ईमान मजारी?

पाकिस्तान की एक वकील और उनके पति को सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करने वाले पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ईमान जैनब मजारी-हजीर और उनके पति हादी अली चत्था को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया और इस्लामाबाद की एक अदालत ने उन्हें लंबी जेल की सजा सुनाई। मजारी-हजीर मानवाधिकार वकील हैं, जबकि चत्था वकील हैं।

गिरफ्तारियों की पुष्टि मजारी-हजीर की मां डॉ. शिरीन मजारी ने की। उन्होंने बताया कि उन्हें "गिरफ्तार कर अलग-अलग कारों में बिठाकर अज्ञात जगहों पर ले जाया गया है।"

मजारी ने X पर लिखा, “फासीवाद अपने चरम पर है। सत्ता में बैठे नपुंसक पुरुष इस उपलब्धि से बहुत खुश होंगे!”


लेकिन मजारी-हजीर कौन है? इस मामले में हुए के बारे में हमें क्या पता है? आइए एक नजर डालते हैं।

कौन हैं मजारी-हजीर?

मजारी-हजीर का जन्म 1994 में इस्लामाबाद में हुआ था। उनकी मां डॉ. शिरीन इमरान खान की सरकार में मानवाधिकार मंत्री रह चुकी हैं, जबकि उनके पिता डॉ. ताबिश हजीर पाकिस्तान के जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ थे। उनका एक छोटा भाई भी है।

मजारी-हजीर ने ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग से कानून की पढ़ाई की। उन्होंने दिसंबर 2023 में अपने पति हादी अली चट्ठा से शादी की।

मजारी-हजीर नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठाने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने बलूच समुदाय से जुड़े जबरन गायब किए जाने के मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ी है। वे बलूच समुदाय की प्रमुख कार्यकर्ता महरंग बलूच की पैरवी भी कर चुकी हैं।

इसके अलावा, उन्होंने नस्लीय भेदभाव, पत्रकारों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों में भी बचाव किया है, जिनमें ईशनिंदा के आरोप झेल रहे लोग और कार्रवाई का सामना कर रहे अफगान नागरिक शामिल हैं।

मजारी-हजीर ने कई बार पाकिस्तानी सरकार और सत्ता तंत्र के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। अगस्त 2023 में इस्लामाबाद में एक प्रदर्शन में हिस्सा लेते समय उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) की एक रैली में उन्होंने पाकिस्तान की सेना को “आतंकवादी” कहा था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

इससे पहले पाकिस्तानी सरकार ने उन पर "साइबर आतंकवाद" और "भड़काऊ भाषण" सहित कई अपराधों का आरोप लगा चुकी है।

क्या है पूरा मामला?

मजारी-हजीर और उनके पति को इस्लामाबाद पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट जाते समय गिरफ्तार कर लिया। दोनों एक ऐसे मामले की सुनवाई में जा रहे थे, जो सोशल मीडिया पर किए गए विवादित पोस्ट से जुड़ा था। इन पोस्ट में कई ताकतवर सरकारी संस्थानों की आलोचना की गई थी।

यह मामला अगस्त 2025 में X पर की गई पोस्ट को लेकर दर्ज साइबर क्राइम शिकायत से शुरू हुआ था। पुलिस ने दोनों पर पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम कानून (PECA) के तहत केस दर्ज किया।

शनिवार को अदालत ने दोनों को “राज्य विरोधी” सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई।

दोनों को इन धाराओं में दोषी ठहराया गया:

  • धारा 9: अपराध या प्रतिबंधित संगठनों का महिमामंडन
  • धारा 10: साइबर आतंकवाद
  • धारा 26-ए: झूठी जानकारी फैलाना

अदालत ने तीनों आरोपों में सजा सुनाई- पांच साल, 10 साल और दो साल। ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट के दस्तावेज में कहा गया कि मजारी-हजीर ने “बेहद आपत्तिजनक” सामग्री फैलाई।

जज ने कहा कि उनके पोस्ट में BLA, TTP और पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट जैसे प्रतिबंधित संगठनों का समर्थन दिखाया गया, राज्य पर जबरन गायब करने के आरोप लगाए गए और पाकिस्तान को “आतंकवादी देश” बताया गया। अदालत के मुताबिक, इससे सरकारी संस्थानों और सेना पर जनता का भरोसा कमजोर हुआ।

मंगलवार को अदालत में मजारी-हजीर ने कहा, “इस देश में सच बोलना बहुत मुश्किल है। लेकिन जब हमने यह रास्ता चुना, तब हमें यह सब पता था। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”

उनके झुकने से इनकार करने के कारण उनकी तुलना पाकिस्तान की दिवंगत मशहूर मानवाधिकार वकील अस्मा जहांगीर से की जा रही है। इस पर मजारी-हजीर ने कहा कि यह तुलना उनके लिए “बहुत बड़ा सम्मान और सौभाग्य” है।

सोमवार को कराची प्रेस क्लब (KPC) के आसपास पुलिस ने सड़कें बंद कर दीं। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पत्रकार, वकील और सिविल सोसायटी के लोग मजारी-हजीर और उनके पति चट्ठा को दी गई सजा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।

पुलिस ने केपीसी तक पहुंच रोकने के लिए कंटेनर और बसें लगा दीं। इससे इलाके में भारी ट्रैफिक जाम हो गया और कई प्रदर्शनकारी वहां पहुंच नहीं पाए।

मानवाधिकार आयोग पाकिस्तान (HRCP) के अध्यक्ष असद इकबाल बट्ट के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में पत्रकार संगठनों ने भी समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने सज़ा और सड़क बंद करने दोनों की निंदा की और कहा कि यह अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर हमला है।

असद इकबाल बट्ट ने कहा, “सड़कें बंद होने की वजह से कई लोग यहां नहीं पहुंच सके, लेकिन फिर भी हम किसी तरह पहुंच गए, यही हमारी जीत है। सरकार की रुकावटों के बावजूद लोग केपीसी पहुंचे। हमें अपनी आवाज उठानी होगी, क्योंकि यह हमारे साथ भी हो सकता है। हम अपने लिए आवाज उठा रहे हैं।”

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