Iran News: ईरान में 'खामेनेई की मौत' के नारों से गूंजी यूनिवर्सिटी, सुरक्षा बलों के साथ छात्रों की हिंसक झड़प; फिर भड़की विरोध की चिंगारी

Iran Protest: यह प्रदर्शन 8 और 9 जनवरी को हुई सबसे घातक हिंसा में मारे गए लोगों की याद में किए गए। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में अब तक सुरक्षाकर्मियों सहित 3,100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठन HRANA का दावा है कि मरने वालों की संख्या 6,000 के पार पहुंच चुकी है

अपडेटेड Feb 22, 2026 पर 11:54 AM
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यह अशांति ऐसे समय में हो रही है जब ओमान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही है

Iran Unrest: ईरान में शनिवार को एक बार फिर सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। देश के कई प्रमुख विश्वविद्यालयों, विशेष रूप से तेहरान और मशहद में छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। यह प्रदर्शन जनवरी में हुई देशव्यापी क्रैकडाउन के 40 दिन पूरे होने पर आयोजित शोक सभाओं के दौरान शुरू हुए। छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिससे देश में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल बन गया है।

कैंपस में 'तानाशाह' के खिलाफ हुई जमकर नारेबाजी


तेहरान की शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और अमीरकबीर यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रदर्शनों के वीडियो सामने आए है। छात्र 'तानाशाह की मौत' और 'आजादी' के नारे लगा रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने तो सुरक्षा बलों को 'बेशर्म' कहकर पुकारा। रिपोर्टों के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े 'बसीज' अर्धसैनिक बलों को कैंपस में तैनात किया गया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों और सरकार समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हुई।

हजारों लोगों की मौत के शोक की 40वीं रात हुए प्रदर्शन

ईरान की परंपरा में मौत के 40वें दिन का विशेष महत्व है। यह प्रदर्शन 8 और 9 जनवरी को हुई सबसे घातक हिंसा में मारे गए लोगों की याद में किए गए। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में अब तक सुरक्षाकर्मियों सहित 3,100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। वहीं, मानवाधिकार संगठन HRANA का दावा है कि मरने वालों की संख्या 6,000 के पार पहुंच चुकी है। इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत दिसंबर में महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी, जो अब धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुकी है।

परमाणु वार्ता और सैन्य तनाव के बीच घरेलू संकट

यह अशांति ऐसे समय में हो रही है जब ओमान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। एक तरफ बातचीत जारी है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस क्षेत्र में दो विमानवाहक पोत तैनात कर दिए हैं, जिसे ईरान ने 'नकारात्मक और उकसाने वाला' कदम बताया है। ईरान सरकार का दावा है कि इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों विशेषकर अमेरिका द्वारा हवा दी जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह जनता का आर्थिक तंगी और राजनीतिक पाबंदियों के खिलाफ असली गुस्सा है।

नेतृत्व के लिए दोहरी चुनौती

ईरान के नेतृत्व के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्हें एक तरफ अपनी धरती पर उठ रहे विद्रोह को शांत करना है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु वार्ता को अंजाम तक पहुंचाना है। रविवार यानी आज के लिए भी प्रदर्शनों की नई अपील की गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि ईरान में फिलहाल शांति की उम्मीद कम नजर या रही है।

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