US Advisory: मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण जंग को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए अब तक की सबसे बड़ी 'इमरजेंसी एडवायजरी' जारी की है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब और यूएई सहित एक दर्जन से अधिक देशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को 'गंभीर सुरक्षा खतरों' का हवाला देते हुए तुरंत क्षेत्र छोड़ने का आदेश दिया है। ईरान द्वारा खाड़ी के देशों में अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर लगातार जारी मिसाइल अटैक के बाद यह अलर्ट जारी किया गया है।
इन 15 देशों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी
अमेरिका ने पश्चिम एशिया के लगभग पूरे नक्शे को 'खतरनाक' घोषित कर दिया है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे जो भी व्यावसायिक उड़ानें उपलब्ध हैं, उनसे तुरंत निकल जाएं। प्रभावित देशों की सूची में ये देश शामिल हैं:
खाड़ी देश: बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
युद्ध क्षेत्र: ईरान, इराक, इजरायल, लेबनान, सीरिया, यमन, और वेस्ट बैंक/गाजा।
पड़ोसी देश: जॉर्डन और मिस्र।
इसके साथ ही जॉर्डन के अम्मान में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों ने भी 'खतरे की आशंका' के चलते परिसर खाली कर दिया है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
अमेरिका ने यह कदम युद्ध के बढ़ते दायरे और सीधे हमलों को देखते हुए उठाया है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग को बंद करने और जहाजों पर हमला करने की धमकी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यह लड़ाई 4 से 5 हफ्ते या उससे भी अधिक समय तक चल सकती है।
ऊर्जा संकट और महंगाई से निपटने की तैयारी
युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग को बुझाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने कमर कस ली है। अमेरिकी अधिकारी मार्को रुबियो के अनुसार, मंगलवार को स्कॉट बेसेेंट और क्रिस राइट ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपायों की घोषणा करेंगे। युद्ध की स्थिति पर नजर रखने और अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए एक 'इंटर-एजेंसी इमरजेंसी टास्क फोर्स' का गठन किया गया है।
अमेरिकी सहायक सचिव मोरा नामदार ने साफ किया है कि फिलहाल जो भी फ्लाइट्स मिल रही हैं, उनसे निकल जाना ही सुरक्षित है, क्योंकि आने वाले दिनों में हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद हो सकते हैं और निकासी अभियान चलाना और भी कठिन हो सकता है।