Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की एक लेटेस्ट सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक एआई जनरेटेड तस्वीर शेयर की है, जिसके साथ उन्होंने लिखा- 'यह तूफान से पहले की शांति थी'।
इस पोस्ट के सामने आने के बाद रक्षा एक्सपर्ट्स और वैश्विक बाजारों में यह डर बैठ गया है कि अगर दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता विफल होती है, तो अमेरिका ईरान पर बड़ा सैन्य हमला कर सकता है।
ट्रंप की वायरल पोस्ट में क्या है?
ट्रंप द्वारा शेयर की गई एआई तस्वीर में वह खुद 'MAGA' कैप पहने हुए अमेरिकी नौसेना के एक एडमिरल के साथ एक युद्धपोत पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। बैकग्राउंड में समंदर में भयंकर तूफान उठता दिख रहा है और अमेरिकी युद्धपोतों के सामने ईरान के झंडे वाले जहाज नजर आ रहे हैं। 'Calm before the storm' इस क्रिप्टिक लाइन और तस्वीर को सीधे तौर पर ईरान के लिए एक खुली सैन्य चेतावनी माना जा रहा है।
सैन्य विकल्पों की समीक्षा शुरू
वाशिंगटन से आ रही खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस और अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी अब 'प्लान बी' यानी सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं।अगर ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत में जल्द ही कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो अमेरिका ईरान के चुनिंदा ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर सकता है।
अभी हाल ही में फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर BFMTV को दिए इंटरव्यू में भी ट्रंप ने दोटूक कहा था कि अगर ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया, तो उसका 'बहुत बुरा वक्त' शुरू होने वाला है।
दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा
यह नया विवाद ऐसे समय में खड़ा हुआ है जब कुछ हफ्तों के भीषण संघर्ष के बाद अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम लागू है। हालांकि, जमीनी स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ है। विवाद के केंद्र में होर्मुज जलमार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। अमेरिका इस समुद्री रास्ते को खुला रखना चाहता है, जबकि ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना पूरा नियंत्रण का दावा कर रहा है। ईरान का बढ़ता परमाणु कार्यक्रम भी अमेरिका और इजरायल की आंख की किरकिरी बना हुआ है।
'अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल'
ट्रंप की इस नई धमकी के बीच ईरान ने बेहद सतर्क रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा था कि उन्हें वाशिंगटन से बातचीत जारी रखने के संदेश तो मिल रहे हैं, लेकिन अमेरिकी इरादों को लेकर तेहरान के भीतर 'अविश्वास और संदेह' की भावना बहुत मजबूत है, जो बातचीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।