US-Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 10 हफ्तों से चला आ रहा संघर्ष विराम अब खत्म होने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव के जवाब को 'कचरा' बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि मौजूदा समझौता 'वेंटिलेटर' पर है और तेहरान की जिद के कारण यह कभी भी ढह सकता है।
'मैंने तो पूरा पढ़ा भी नहीं'
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान के जवाब की तीखी आलोचना की। ट्रंप ने कहा, 'ईरान ने जो भेजा है वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। मैंने उसे पूरा पढ़ा भी नहीं, वह किसी 'कचरे' जैसा था। यह अब तक का सबसे कमजोर समझौता है।'
अमेरिका का कहना है कि शांति तभी संभव है जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बड़ी रियायतें दे, लेकिन तेहरान के जवाब में इसका कोई जिक्र नहीं था। ट्रंप ने सीजफायर की तुलना एक ऐसे गंभीर मरीज से की जिसके बचने की उम्मीद न के बराबर है।
क्या हैं तेहरान की मांगें?
पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए भेजे गए अपने जवाब में ईरान ने शांति के बदले कई कड़ी शर्तें रखी हैं:
होर्मुज पर हक: ईरान चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए।
लेबनान में शांति: ईरान ने मांग की है कि उसके सहयोगी संगठन 'हिजबुल्लाह' और इजरायल के बीच जारी युद्ध को तुरंत रोका जाए।
आर्थिक मांगें: अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, फ्रीज किए गए फंड को वापस करना और ईरान के तेल निर्यात पर लगी रोक खत्म करना।
मुआवजा: युद्ध में हुए नुकसान के लिए ईरान ने मुआवजे की भी मांग की है।
क्या है 'परमाणु डस्ट' का विवाद?
ट्रंप ने सोमवार को यह भी कहा कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम छोड़ने को तैयार है, जिसे उन्होंने 'परमाणु डस्ट' कहा। ट्रंप का दावा है कि इस खतरनाक सामग्री को वहां से सुरक्षित निकालने की क्षमता केवल अमेरिका और चीन के पास है। हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सारा परमाणु मटीरियल ईरान से बाहर नहीं निकलता, तब तक 'जंग खत्म नहीं हुई है'।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस तनाव का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर दिख रहा है। होर्मुज के रास्ते से ही दुनिया का 20% तेल गुजरता है। ईरान की धमकियों और अमेरिकी नाकेबंदी के कारण तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $105 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं।