मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर रविवार को बड़ा हमला हुआ है। UAE के बाराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर पर ड्रोन से हमला किया गया, जिससे आग लग गई। अबू धाबी मीडिया ऑफिस ने रविवार को जानकारी दी कि अल धाफरा क्षेत्र स्थित बराका न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी सुरक्षा घेरे के पास एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में ड्रोन हमले के कारण आग लग गई।
न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला
अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। साथ ही रेडियोलॉजिकल सुरक्षा पर भी कोई असर नहीं पड़ा है। फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन ने बताया कि न्यूक्लियर प्लांट के सभी मुख्य सिस्टम सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील भी की है। अधिकारियों ने अपने बयान में यह नहीं बताया कि इस संदिग्ध ड्रोन हमले के पीछे किसका हाथ था। हालांकि, इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान UAE में पहले भी कई मिसाइल और ड्रोन हमले हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, इनमें कुछ हमले ईरान की ओर से किए गए थे, जिनका निशाना ऊर्जा परियोजनाएं और समुद्री ढांचा था।
UAE नए पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर कर रहा काम
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब UAE एक नए पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य देश को होर्मुज स्ट्रेट पर कम निर्भर बनाना और तेल निर्यात को और मजबूत करना है। ऐसे में इस तरह के हमले क्षेत्र की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं। अबू धाबी मीडिया ऑफिस के मुताबिक, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान ने सरकारी तेल कंपनी ADNOC को इस महत्वपूर्ण पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि नई पाइपलाइन के शुरू होने के बाद फुजैरा मार्ग से तेल निर्यात क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी। उम्मीद है कि यह परियोजना अगले साल से काम करना शुरू कर देगी, जिससे UAE को तेल निर्यात के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।
UAE का बराका न्यूक्लियर पावर प्लांट एक बार फिर चर्चा में है। रविवार को हुआ ड्रोन हमला पहली ऐसी घटना थी, जब अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इस चार-रिएक्टर वाले न्यूक्लियर प्लांट को निशाना बनाया गया। यह प्लांट अबू धाबी के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में सऊदी अरब सीमा के पास स्थित है। दक्षिण कोरिया के सहयोग से तैयार किए गए इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को बनाने में करीब 20 अरब डॉलर की लागत आई थी। बराका न्यूक्लियर पावर प्लांट ने साल 2020 में काम शुरू किया था। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अरब प्रायद्वीप का पहला और फिलहाल एकमात्र न्यूक्लियर पावर प्लांट है। यह परियोजना UAE की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और तेल पर निर्भरता कम करने के लिए बेहद अहम मानी जाती है।