Hormuz Tension: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस समुद्री रूट से प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल यानी दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इसके बंद होने से 'दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी बॉटलनैक' पैदा हो गया है, यानी डिमांड के मुकाबले सप्लाई में भारी कमी देखी जा रही है। इससे निपटने के लिए अलग-अलग देशों ने कड़े और असाधारण कदम उठाए हैं।
भारत: टैक्स में कटौती और घरेलू आपूर्ति पर जोर
भारत सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए अपने खजाने पर बोझ सहने का फैसला किया है। पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। देश में ईंधन की कमी न हो, इसके लिए डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर ड्यूटी लगा दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी (LPG) या ईंधन की कोई कमी नहीं है और किल्लत की खबरों को "भ्रामक अभियान" बताया है।
पाकिस्तान: हवाई सफर हुआ महंगा
पाकिस्तान वैश्विक कीमतों और घरेलू स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं, लेकिन मिट्टी के तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। विमान ईंधन के दाम बढ़ने से घरेलू उड़ानों के टिकट 150% तक महंगे हो गए हैं।
वियतनाम: टैक्स फ्री हुआ पेट्रोल-डीजल
वियतनाम ने बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सबसे आक्रामक कदम उठाया है। पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले 'पर्यावरण संरक्षण टैक्स' को अप्रैल के मध्य तक हटा दिया गया है। इस फैसले से पेट्रोल की कीमतों में 26% और डीजल में 15% तक की बड़ी गिरावट आई है।
मिस्र और श्रीलंका: बिजली और ईंधन की 'राशनिंग'
इन देशों ने खपत कम करने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। मिस्र में दुकानों, कैफे और रेस्तरां को रात 9 बजे तक बंद करने का आदेश दिया गया है। सड़कों की लाइटें भी कम कर दी गई हैं। वहीं श्रीलंका में फिर से QR कोड आधारित ईंधन राशनिंग शुरू हो गई है। हफ्ते में केवल सीमित तेल ही मिलेगा। साथ ही, ईंधन बचाने के लिए बुधवार को 'नो-वर्क डे' घोषित किया गया है।
वेनेजुएला: गर्मी और ऊर्जा संकट का दोहरा वार
वेनेजुएला में स्थिति थोड़ी अलग लेकिन गंभीर है। भीषण गर्मी और बिजली संकट के कारण सरकार ने पूरे शिक्षा क्षेत्र और सरकारी दफ्तरों में एक हफ्ते की छुट्टी घोषित कर दी है।
खाद्य सुरक्षा पर भी मंडराता खतरा
ईंधन संकट का असर अब खेती पर भी दिख रहा है। श्रीलंका जैसे देशों में उर्वरक की कमी के कारण खाद्य कीमतों में 15% तक की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। भारत में भी गैस की आपूर्ति बाधित होने से यूरिया की कमी होने की संभावना है। हालांकि, भारत के पास फिलहाल पर्याप्त खाद आपूर्ति है लेकिन आने वाले दिनों में फसलों की बुवाई होनी है जो खाद की कमी से प्रभावित होने की आशंका है।