मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इजरायल और हिजबुल्ला के बीच संघर्ष विराम (Ceasefire) बढ़ाने के समझौते के बावजूद, सीमा पर रॉकेटों और ड्रोनों की बरसात शुरू हो गई है। इजरायली सेना ने दावा किया है कि बीते वीकेंड में हिजबुल्ला ने इजरायल की तरफ 200 से अधिक रॉकेट और अन्य प्रोजेक्टाइल दागे हैं। इस नए हमले ने न केवल युद्धविराम की शर्तों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी अपनी कैबिनेट के साथ आपातकालीन चर्चा करनी पड़ी है।
आपको बता दें कि इजरायल और लेबनान के बीच शुक्रवार को ही संघर्ष विराम को 45 दिनों के लिए बढ़ाने पर सहमति बनी थी, लेकिन यह शांति समझौते के कागजों पर ही रह गई। रविवार को एक इजरायली सैन्य अधिकारी ने बताया कि हिजबुल्ला ने पिछले 48 घंटों में इजरायली क्षेत्र और आईडीएफ (IDF) के सैनिकों को निशाना बनाकर लगभग 200 हमले किए हैं।
युद्धविराम का खुला उल्लंघन
इजरायली सेना के आधिकारिक बयान के मुताबिक हिजबुल्ला की ओर से किए गए ये हमले युद्धविराम की समझ का स्पष्ट और निरंतर उल्लंघन हैं। गौरतलब है कि दोनों पक्षों के दूतों ने शुक्रवार को ही संघर्ष विराम की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला लिया था, ताकि मानवीय मदद और शांति की प्रक्रिया को गति दी जा सके।
नेतन्याहू की कैबिनेट बैठक: FPV ड्रोन बना बड़ी चुनौती
रविवार को साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक नए और विशिष्ट खतरे का जिक्र किया। नेतन्याहू ने बताया कि हिजबुल्ला अब इजरायली सेना के खिलाफ कम लागत वाले फाइबर-ऑप्टिक फर्स्ट-पर्सन-व्यू (FPV) ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है। नेतन्याहू ने अपनी कैबिनेट और रक्षा विशेषज्ञों की टीम को निर्देश देते हुए कहा कि आज हम FPV ड्रोनों को बेअसर करने की चुनौती का सामना कर रहे हैं। यह एक विशिष्ट प्रकार का खतरा है। मैंने अपनी टीम को निर्देश दिया है कि इस खतरे और आने वाले भविष्य के अन्य खतरों का समाधान खोजा जाए।
कैसे शुरू हुआ यह ताजा संघर्ष?
लेबनान इस युद्ध की जद में तब आया जब 2 मार्च को हिजबुल्ला ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान के जवाब में इजरायल पर रॉकेट दागे थे। इसके प्रतिशोध में इजरायल ने दक्षिण लेबनान पर आक्रमण किया और तब से हिजबुल्ला के ठिकानों पर लगातार हमले जारी हैं।
लेबनान का दावा- अबतक 2900 लोग मारे गए
युद्ध की शुरुआत से अब तक के आंकड़े भयावह हैं। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक अब तक 2900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 17 अप्रैल को शुरू हुए संघर्ष विराम के बाद से ही 400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इजरायली सेना का कहना है कि दक्षिण लेबनान में जमीनी कार्रवाई शुरू होने के बाद से उन्होंने 20 सैनिक और एक नागरिक ठेकेदार खोया है। हिजबुल्ला द्वारा दागे गए 200 रॉकेटों और पीएम नेतन्याहू के कड़े रुख के बाद अब मिडिल ईस्ट में संघर्ष विराम के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।