Hormuz To Reopen: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग को रोकने के लिए सोमवार को एक बड़े शांति प्रस्ताव का खाका अमेरिका और ईरान को सौंपा गया है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी है कि अगर मंगलवार तक समझौता नहीं हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो ईरान पर 'भयंकर तबाही' बरपेगी।
हालांकि, खाड़ी में तनाव अब भी बरकरार है क्योंकि ईरान ने अस्थायी युद्धविराम के हिस्से के रूप में इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को खोलने से साफ इनकार कर दिया है।
दो फेज वाले 'शांति प्रस्ताव' में क्या है?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस शांति प्रस्ताव को दो चरणों में तैयार किया गया है:
तत्काल युद्धविराम: पहले चरण में युद्ध को तुरंत रोकने का प्रस्ताव है।
व्यापक समझौता: दूसरे चरण में भविष्य के लिए एक स्थायी और विस्तृत शांति समझौता करना शामिल है।
वहीं 'एक्सियोस' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ 45 दिनों के युद्धविराम पर चर्चा कर रहे हैं, जो आगे चलकर युद्ध के स्थायी अंत का रास्ता साफ कर सकता है।
पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
रिपोर्ट के अनुसार इस शांति प्रस्ताव में पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। सूत्रों के अनुसार, मुनीर पूरी रात अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ लगातार संपर्क में रहे हैं ताकि किसी तरह समझौते की जमीन तैयार की जा सके।
ट्रंप ने मंगलवार तक का दिया है अल्टीमेटम
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को सीधी धमकी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर मंगलवार तक ईरान समझौता नहीं करता और होर्मुज का रास्ता नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के एनर्जी और बुनियादी ढांचे पर भीषण हमले करेगा। सोमवार को भी क्षेत्र में ताज़ा हवाई हमले जारी रहे। पिछले पांच हफ्तों से जारी इस युद्ध में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं।
'होर्मुज नहीं खुलेगा': ईरान
ईरान ने शांति प्रस्ताव पर विचार करने की बात तो कही है, लेकिन उसकी अपनी शर्तें हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि किसी भी अस्थायी युद्धविराम के दौरान वे होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेंगे। इसके साथ ही ईरान ने कहा है कि वह प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है, लेकिन वह ट्रंप द्वारा दी गई किसी भी 'डेडलाइन' को स्वीकार नहीं करेगा।
दुनियाभर में तेल की सप्लाई पर संकट बरकरार
28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया हुआ है। यही से दुनियाभर की 20% तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई होती है जिससे भारी संकट गहराता जा रहा है। इसके साथ ही ईरान ने इजरायल, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ठिकानों पर भी जवाबी हमले जारी रखे हुए है। इस वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है और तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।