India-Bangladesh Relations: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान अब पड़ोसी देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन 17 फरवरी को राष्ट्रीय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में तारिक रहमान के नए मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे। रहमान ने बांग्लादेश में किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दिया है। उन्होंने कहा कि 13वें आम चुनाव ने सुरक्षित एवं मानवता का सम्मान करने वाला बांग्लादेश बनाने के लिए एक नया रास्ता खोला है। रहमान अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की जगह लेंगे।
उन्होंने दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के पुनरुद्धार और अपनी सरकार की विदेश नीति को बांग्लादेश तथा उसके लोगों के व्यापक हितों तय करने की बात भी कही। तारिक रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी भारत और दूसरे साउथ एशियाई देशों के साथ रिश्तों सहित फॉरेन पॉलिसी बनाते समय 'बांग्लादेश फर्स्ट' रखेगी। भारत के साथ रिश्तों पर एक सवाल के जवाब में BNP चीफ ने कहा कि बांग्लादेश और उसके लोगों के हित सभी बाहरी रिश्तों को तय करेंगे। उन्होंने नेशनल प्रायोरिटीज़ के हिसाब से पॉलिसी बनाने पर जोर दिया।
रहमान की बीएनपी ने ऐतिहासिक संसदीय चुनावों में शुक्रवार को दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ शानदार जीत दर्ज की। संसदीय चुनावों में भारी जीत के एक दिन बाद 60 वर्षीय रहमान ने कहा, "हमारे रास्ते और विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के हित में हमें एकजुट रहना होगा। मैं दृढ़ता से मानता हूं कि राष्ट्रीय एकता हमारी सामूहिक ताकत है, जबकि विभाजन हमारी कमजोरी।"
उन्होंने कहा, "आज से हम सभी स्वतंत्र हैं, स्वतंत्रता और अधिकारों की वास्तविक भावना बहाल हो गई है।" रहमान ने कहा कि हालांकि शांति और कानून-व्यवस्था किसी भी कीमत पर बनाए रखनी होगी। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 13वें संसदीय चुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद 15 वर्ष से अधिक समय तक शासन करने वालीं शेख हसीना को सत्ता छोड़कर भारत भागना पड़ा था। इसके बाद अल्पसंख्यकों पर व्यापक हमले भी हुए थे।
रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी चीन, भारत और पाकिस्तान के साथ संबंधों में देश के हितों की रक्षा करने वाली विदेश नीति अपनाएगी। उन्होंने कहा, "बांग्लादेश की विदेश नीति 'बांग्लादेश और उसके लोगों के व्यापक हितों' के हिसाब से तय होगी।" 'बेल्ट एंड रोड' पहल और चीन के साथ भविष्य के संबंधों पर उन्होंने कहा, "यदि कोई चीज बांग्लादेश के हित में नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से हम उसे आगे नहीं बढ़ा सकते। मुझे विश्वास है कि पारस्परिक हित हमारी पहली प्राथमिकता होंगे।"
रहमान ने दक्षेस को पुनर्जीवित करने की बात करते हुए कहा, "दक्षेस (सार्क) की स्थापना बांग्लादेश की पहल पर हुई थी। हम चाहते हैं कि यह सक्रिय रूप से कार्य करे। हम अपने मित्र देशों के साथ चर्चा करेंगे और दक्षेस को पुनर्जीवित करने का प्रयास करेंगे।" करीब दो दशकों तक राजनीतिक वनवास झेलने के बाद बीएनपी दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में लौटी है।
पाकिस्तान की करीबी मानी जाने वाली और 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध करने वाली बीएनपी की पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है। निवर्तमान अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री हसीना की अवामी लीग के चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
रहमान ने जोर देकर कहा, "हमें एकजुट रहना होगा और जनता की इच्छा को ध्यान में रखना होगा, ताकि कोई भी दुष्ट शक्ति देश में फिर से निरंकुश शासन स्थापित न कर सके।" उन्होंने कहा, सुरक्षित और मानवता का सम्मान करने वाले बांग्लादेश के निर्माण के लिए हमें सभी के सहयोग की आवश्यकता है। इस बार देश के पुनर्निर्माण में हर किसी को जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी।"
BNP नेता ने कहा कि देश के स्वतंत्रता-प्रेमी लोगों ने बीएनपी को विजयी बनाया है। उन्होंने चुनाव परिणाम को जनता की जीत बताया। हालांकि, उन्होंने अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध हटाने के अपने रुख पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने बताया कि चुनाव में करीब 50 राजनीतिक दलों ने भाग लिया।
ब्रिटेन में 17 वर्षों के निर्वासन से लौटने के कुछ ही दिन बाद शुरू हुए चुनाव प्रचार के दौरान रहमान ने उकसाऊ बयानबाजी से परहेज करते हुए संयम एवं सुलह का ऐलान किया था। निर्वाचन आयोग (EC) के अनुसार, बीएनपी ने 297 में से 209 सीट जीतीं। जबकि दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीट पर जीत मिलीं। हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।